बीवी के बाद साली चुद्वाकर माँ बनी

मेरी प्यारी बीवी मेरे बेटे की डेलिवरी के वक्त इस दुनिया मे मुझे अकेला छ्चोड़ कर चली गयी.मनीषा के गुजर जाने से मैं बिल्कुल अकेला हो गया था. और वैसे भी मैं शालिनी को बहुत प्यार करता था और उसकी कुँवारी चूत की सील तोड़ने के बाद एक भी दिन ऐसा नही गया जब हमने रात मे कम से कम 3 बार चुदाई ना की हो

भरी जवानी मे औरत के बिना जीवन गुजारना और ऊपर से एक बच्चे की परवरिश की ज़िम्मेदारी सचमुच बड़ा ही मुश्किल था. लेकिन छ्होटी साली साधना ने नवजात बच्चे को अपने छाती से लगा कर घर को काफ़ी कुच्छ संभाल लिया. दीदी के गुजरने के बाद साधना अपनी मा के कहने पर कुच्छ दीनो के लिए मेरे पास रहने के लिए आ गयी थी. साधना तो वैसे ही खूबसूरत थी, बदन मे जवानी के लक्षण उभरने से और भी सुंदर लगने लगी थी. औरत के बिना मेरा जीवन बिल्कुल सूना सूना सा हो चुका था. लेकिन सेक्स की आग मेरे शरीर और मन मे दिन पर दिन बढ़ती ही जा रही थी. राते गुजारना मुश्किल हो गया था. कभी कभी अपनी साली.

साधना के कमसिन गोलाईयो को देख कर मेरा मन लालचाने लगता था. जैसा नाम वैसा ही उसका कमसिन जिस्म. साधना जो काम की अग्नि को बड़ा दे. मगर वा मेरी सग़ी साली थी यही सोच कर अपने मन पर काबू कर लेता था. फिर भी कभी कभी मन बेकाबू हो जाता और जी चाहता कि. साधना को नंगी करके अपनी बाहो मे भर लू.उसके छ्होटी छ्होटी कसी हुए चूचीयो को मूह मे भर कर देर तक चूसता रहू और फिर उसे बिस्तर पर लेटा कर उसकी नन्ही सी चूत मे अपना मोटा लॅंड घुसा कर खूब चोदू…एक दिन मैं अपने ऑफीस के एक दोस्त के साथ एक इंग्लीश फिल्म देखने गया. फिल्म बहूत ज़्यादा सेक्सी थी. नग्न और संभोग के द्रश्यो की भरमार थी. फिल्म देखते हुए मे कई बार उत्तेजित हो गया था सेक्स का बुखार मेरे सर पर चढ़ कर बोलने लगा था. घर लौटते समय मे फिल्म के चुदाई वाले सीन्स को बार बार सोच रहा था और जब भी उन्हे सोचता, साधना का चेहरा मेरे सामने आ जाता मैं बेकाबू होने लगा था.

मैने मन बना लिया कि आज चाहे जो भी हो, अपनी साली को चोदूगा ज़रूर. घर पहुचने पर साधना ने दरवाजा खोला. मेरी नज़र सबसे पहले उसके भोले भाले मासूम चेहरे पर गयी फिर टी-शर्ट के नीचे धकी हुई उसकी नन्ही चूचियो पर और फिर उसके टाँगो के बीच चड्धी मे छुपी हुए छ्होटी सी मक्खन जैसी मुलायम बुर पे. मुझे अपनी ओर अजीब नज़ारो से देखते हुए पकड़ . साधना ने पूच्छा,क्या बात हे जीजू, ऐसे क्यो देख रहे है?” मैने कहा, “कुच्छ नही . साधना..बस ऐसे ही…… तबीयत कुच्छ खराब हो गई.” . साधना बोली. “आपने कोई दवा ली या नही?अभी नही” मैने जबाब दिया और फिर अपने कमरे मे जा कर लूँगी पहन कर बिस्तर पर लेट गया.थोड़ी देर बाद . साधना आई और बोली, “कुच्छ चाहिए जीजुजी मंन मे आया कि कह दू “साली मुझे चोदने के लिए तुम्हारी चूत चाहिए.” पर मैं ऐसा कह नही सकता था.मैने कहा “. साधना मेरे टाँगो मे बहुत दर्द है. थोड़ा तेल ला कर मालिश कर दो.” “ठीक है जीजू,” कह कर . साधना चली गयी और फिर थोड़ी देर मे एक कटोरी मे तेल लेकर वापस आ गयी. वो बिस्तर पर बैठ गयी और मेरे दाहिने टाँग से लूँगी घुटने तक उठा कर मालिश करने लगी.

अपनी 14 साल की साली के नाज़ुक हाथो का स्पर्श पाकर मेरा लॅंड तुरंत ही कठोर होकर खड़ा हो गया.थोड़ी देर बाद मैने कहा, “. साधना ज़्यादा दर्द तो जाँघो मे है. थोड़ा घुटने के उपर भी तेल मालिश कर दे.” “जी जीजू” कह कर . साधना ने लूँगी को जाँघो पर से हटाना चाहा. तभी जानबूझ कर मैने अपना बाया पैर उपर उठाया जिससे मेरा फुनफूनाया हुआ खड़ा लॅंड लूँगी के बाहर हो गया. मेरे लॅंड पर नज़र पड़ते ही . साधना सकपका गयी. कुच्छ देर तक वह मेरे लॅंड को कनखियो से देखती रही. फिर उसे लूँगी से ढकने की कोशिश करने लगी. लेकिन लूँगी मेरे टाँगो से दबी हुई थी इसलिए वो उसे ढक नही पाई. मैने मौका देख कर पूछा, “क्या हुआ साधना? जी जीजू. आपका अंग दिख रहा है.” .

साधना ने सकुचाते हुए कहा.अंग, कौन सा अंग?” मैने अंजान बन कर पूच्छा.जब साधना ने कोई जवाब नही दिया तो मैने अंदाज से अपने लॅंड पर हाथ रखते हुए कहा, “अरे! ये कैसे बाहर निकल गया?” फिर मैने कहा, “साली जब तुमने देख ही लिया तो क्या शरमाना, थोड़ा तेल लगा कर इसकी भी मालिश कर दो.” मेरी बात सुन कर साधना घबरा गयी और शरमाते हुए बोली, “छी जीजू, कैसी बात करते है, जल्दी से ढाकिये इसे.” “देखो साधना ये भी तो शरीर का एक अंग ही है,तो फिर इसकी भी कुच्छ सेवा होनी चाहिए ना.तुम्हारी जीजी जब थी तो इसकी खूब सेवा करती थी, रोज इसकी मालिश करती थी. उसके चले जाने के बाद बेचारा बिल्कुल अनाथ हो गया है. तुम इसके दर्द को नही समझोगी तो कौन समझेगा?” , मैने इतनी बात बड़े ही मासूमियत से कह डाली.लेकिन जीजू, मैं तो आपकी साली हू. मुझसे ऐसा काम करवाना तो पाप होगा,ठीक है साधना, अगर तुम अपने जीजू का दर्द नही समझ सकती और पाप- पुन्य की बात करती हो तो जाने दो.

” मैने उदासी भरे स्वर मे कहा.मैं आपको दुखी नही देख सकती जीजू. आप जो कहेंगे, मैं कारूगी.” मुझे उदास होते देख कर साधना भावुक हो गयी थी.. उसने अपने हाथो मे तेल चिपॉड कर मेरे खड़े लॅंड को पकड़ लिया. अपने लॅंड पर साधना के नाज़ुक हाथो क़ा स्पर्श पाकर, वासना की आग मे जलते हुए मेरे पूरे शरीर मे एक बिजली सी दौड़ गयी. मैने साधना की कमर मे हाथ डाल कर उसे अपने से सटा लिया.बस साली, ऐसे ही सहलाती रहो. बहुत आराम मिल रहा है.” मैने उसे पीठ पर हाथ फेरते हुए कहा.थोड़ी ही देर मे मेरा पूरा जिस्म वासना की आग मे जलने लगा. मेरा मन बेकाबू हो गया. मैने साधना की बाह पकड़ कर उसे अपने उपर खींच लीया. उसकी दोनो चूचिया मेरी छाती से चिपक गयी. मैं उसके चेहरे को अपनी हथेलियो मे लेकर उसके होठ को चूमने लगा. साधना को मेरा यह प्यार शायद समझ मे नही आया.वो कसमसा कर मुझसे अलग होते हुए बोली.

“जीजू ये आप क्या कर रहे है? साधना आज मुझे मत रोको. आज मुझे जी भर कर प्यार करने दो. लेकिन जीजू, क्या कोई जीजा अपनी साली को ऐसे प्यार करता है?” , साधना ने आश्चर्या से पूछा.साली तो आधी घर वाली होती है और जब तुमने घर सम्हाल लिया है तो मुझे भी अपना बना लो. मैं औरो की बात नही जानता, पर आज मैं तुमको हर तरह से प्यार करना चाहता हू. तुम्हारे हर एक अंग को चूमना चाहता हू. प्लीज़ आज मुझे मत रोको साधना.” मैने अनुरोध भरे स्वर मे कहा.मगर जीजू, जीजा साली के बीच ये सब तो पाप है. साधना ने कहा. “पाप-पुण्या सब बेकार की बाते हैं साली. जिस काम से दोनो को सुख मिले और किसी क़ा नुकसान ना हो वो पाप कैसे हो सकता है?

” मैने अपना तर्क दीया.लेकिन जीजू, मैं तो अभी बहुत छ्होटी हू.” साधना ने अपना डर जताया.वह सब तुम मुझ पर छोड़ दो. मैं तुम्हे कोई तकलीफ़ नही होने दूँगा.” मैने उसे भरोसा दिलाया.

साधना कुछ देर गुमसुम सी बैठी रही तो मैने पूछा. “बोलो साली, क्या कहती हो?ठीक है जीजू, आप जो चाहे कीजिए. मैं सिर्फ़ आपकी खुशी चाहती हू.” मेरी साली का चेहरा शर्म से लाल हो रहा था. साधना की स्वीकरती मिलते ही मैने उसके नाज़ुक बदन को अपनी बाहो मे भींच लीया और उसके पतले पतले गुलाबी होंठो को चूसने लगा. उसका विरोध समाप्त हो चुका था. मैं अपने एक हाथ को उसके टी-शर्ट के अंदर डाल कर उसकी छ्होटी छ्होटी चूचियो को हल्के हल्के सहलाने लगा. फिर उसके निप्पल को चुटकी मे लेकर मसलने लगा. थोड़ी ही देर मे साधना को भी मज़ा आने लगा और वो शी….शी. .ई.. करने लगी.मज़ा आ रहा है जीजू… आ… और कीजीए बहुत अच्छा लग रहा है.

अपनी साली की मस्ती को देख कर मेरा हौसला और बढ़ गया. हल्के विरोध के बावजूद मैने साधना की टी-शर्ट उतार दी और उसकी एक चूची को मूह मे लेकर चूसने लगा. दूसरी चूची को मैं हाथो मे लेकर धीरे धीरे दबा रहा था. साधना को अब पूरा मज़ा आने लगा था. वह धीरे धीरे बुदबुदाने लगी. “ओह. आ… मज़ा आ रहा है जीजू..और ज़ोर ज़ोर से मेरी चूची को चूसिए.. अयाया…आपने ये क्या कर दिया?… ओह… जीजू.अपनी साली को पूरी तरह से मस्त होती देख कर मेरा हौसला बढ़ गया. मैने कहा. साधना मज़ा आ रहा है ना?हा जीजू बहुत मज़ा आ रहा है. आप बहुत अच्छी तराहा से चूची चूस रहे है.” साधना ने मस्ती मे कहा.अब तुम मेरा लॅंड मूह मे लेकर चूसो, और ज़्यादा मज़ा आएगा.” मैने साधना से कहा. ठीक है जीजू. ” वो मेरे लॅंड को मूह मे लेने के लिए अपनी गर्दन को झुकाने लगी तो मैने उसकी बाह पकड़ कर उसे इस तरह लिटा दिया कि उसका चेहरा मेरे लॅंड के पास और उसके चूतड़ मेरे चेहरे की तरफ हो गये. वो मेरे लॅंड को मूह मे लेकर आइसक्रीम की तरह मज़े से चूसने लगी.

मेरे पूरे शरीर मे हाई वोल्टेज क़ा करंट दौड़ने लगा. मैं मस्ती मे बड़बड़ाने लगा.हा साधना, हा.. शाबाश.. बहुत अच्छा चूस रही हो, ..और अंदर लेकर चूसो.” साधना और तेज़ी से लॅंड को मूह के अंदर बाहर करने लगी. मैं मस्ती मे पागल होने लगा.मैने उसकी स्कर्ट और चड्धी दोनो को एक साथ खींच कर टाँगो से बाहर निकाल कर अपनी साली को पूरी तरह नंगी कर दिया और फिर उसकी टाँगो को फैला कर उसकी चूत को देखने लगा. वाह! क्या चूत थी, बिल्कुल मक्खन की तरह चिकनी और मुलायम. छोटे छोटे हल्के भूरे रंग के बाल उगे थे. मैने अपना चेहरा उसकी जाँघो के बीच घुसा दिया और उसकी नन्ही सी बुर पर अपनी जीभ फेरने लगा.चूत पर मेरी जीभ की रगड़ से साधना का शरीर गनगना गया. उसका जिस्म मस्ती मे कापने लगा.

वह बोल उठी. “हाय जीजू…. ये आप क्या कर रहे है… मेरी चूत क्यो चाट रहे है…आ… मैं पागल हो जाऊंगी… ओह…. मेरे अच्छे जीजू… हाय… मुझे ये क्या होता जा रहा है..” साधना मस्ती मे अपनी कमर को ज़ोर ज़ोर से आगे पीछे करते हुए मेरे लॅंड को चूस रही. उसके मूह से थूक निकल कर मेरी जाँघो को गीला कर रहा था. मैने भी चाट-चाट कर उसकी चूत को थूक से तर कर दिया था. करीब 10 मिनट तक हम जीजा- साली ऐसे ही एक दूसरे को चूसते चाटते रहे. हम लोगो का पूरा बदन पसीने से भीग चुका था. अब मुझसे सहा नही जा रहा था. मैने कहा. ” साधना साली अब और बर्दाश्त नही होता. टू सीधी होकर, अपनी टांगे फैला कर लेट जा. अब मैं तुम्हारी चूत मे लॅंड घुसा कर तुम्हे चोदना चाहता हू. मेरी इस बात को सुन कर साधना डर गयी. उसने अपनी टांगे सिकोड कर अपनी बुर् को छुपा लिया और घबरा कर बोली. “नही जीजू, प्लीज़ा ऐसा मत कीजिए.मेरी चूत अभी बहुत छ्होटी है और आपका लॅंड बहुत लंबा और मोटा है.मेरी बुर फट जाएगी और मैं मर जाऊंगी.

प्लीज़ इस ख़याल को अपने दिमाग़ से निकाल दीजिए.मैने उसके चेहरे को हाथो मे लेकर उसके होतो पर एक प्यार भरा चुंबन जड़ते हुए कहा. “डरने की कोई बात नही है साधना. मैं तुम्हारा जीजा हू और तुम्हे बहुत प्यार करता हू. मेरा विश्वास करो मैं बड़े ही प्यार से धीरे धीरे चोदुगा और तुम्हे कोई तकलीफ़ नही होने दूँगा.लेकिन जीजू, आपका इतना मोटा लॅंड मेरी छ्होटी सी बुर मे कैसे घुसेगा? इसमे तो उंगली भी नही घुस पाती है.” साधना ने घबराए हुए स्वर मे पूछा.इसकी चिंता तुम छोड़ दो साधना और अपने जीजू पर भरोसा रखो. मैं तुम्हे कोई तकलीफ़ नही होने दूँगा.” मैने उसके सर पर प्यार से हाथ फेरते हुए भरोसा दिलाया.मुझे आप पर पूरा भरोसा है जीजू, फिर भी बहुत डर लग रहा है. पता नही क्या होने वाला है.” साधना का डर कम नही हो पा रहा था. मैने उसे फिर से धाँढस दिया. “मेरी प्यारी साली, अपने मन से सारा डर निकाल दो और आराम से पीठ के बल लेट जाओ. मैं तुम्हे बहुत प्यार से चोदून्गा. बहुत मज़ा आएगा.ठीक है जीजू, अब मेरी जान आपके हाथो मे है.” साधना इतना कहकर पलंग पर सीधी होकर लेट गयी लेकिन उसके चेहरे से भय सॉफ झलक रहा था. मैने पास की ड्रेसिंग टेबल से वैसलीन की शीशी उठाई. फिर उसकी दोनो टाँगो को खींच कर पलंग से बाहर लटका दिया.

साधना डर के मारे अपनी चूत को जाँघो के बीच दबा कर छुपाने की कोशिश कर रही थी. मैने उन्हे फैला कर चौड़ा कर दिया और उसकी टाँगो के बीच खड़ा हो गया. अब मेरा तना हुआ लॅंड साधना की छ्होटी सी नाज़ुक चूत के करीब हिचकोले मार रहा था. मैने धीरे से वैसलीन लेकर उसकी चूत मे और अपने लॅंड पर चिपोड ली ताकि लॅंड घुसाने मे आसानी हो. सारा मामला सेट हो चुका था. अपनी कमसिन साली की मक्खन जैसी नाज़ुक बुर को चोदने का मेरा बरसो पुराना ख्वाब पूरा होने वाला था. मैं अपने लॅंड को हाथ से पकड़ कर उसकी चूत पर रगड़ने लगा. कठोर लॅंड की रगड़ खाकर थोड़ी ही देर मे साधना की फुददी (क्लितोरिस) कड़ी हो कर तन गयी. वो मस्ती मे कापने लगी और अपने चूतड़ को ज़ोर ज़ोर से हिलाने लगी.बहुत अच्छा लग रहा है जीजू……. ओ..ऊ… ओ..ऊओह ..आ बहुत मज़ा आआअरहा है… और रगड़िए जीजू…तेज तेज रगड़िए…. ” वो मस्ती से पागल होने लगी थी और अपने ही हाथो से अपनी चूचियो को मसलने लगी थी. मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा था. मैं बोला.मुझे भी बहुत मज़ा आ रहा है साली. बस ऐसे ही साथ देती रहो.

आज मैं तुम्हे चोदकर पूरी औरत बना दूँगा. ” मैं अपना लॅंड वैसे ही लगातार उसकी चूत पर रगड़ता जा रहा था. वो फिर बोलने लगी. “हाय जीजू जी…ये आपने क्या कर दिया…ऊऊओ. .मेरे पूरे बदन मे करंट दौड़ रहा है…….मेरी चूत के अंदर आग लगी हुई है जीजू… अब सहा नही आता.. ऊवू जीजू जी… मेरे अच्छे जीजू…. कुछ कीजिए ना.. मेरे चूत की आग बुझा दीजिए….अपना लॅंड मेरी बर मे घुसा कर चोदिये जीजू…प्लीज़. . जीजू…चोदो मेरी चूत को.लेकिन साधना, तुम तो कह रही थी की मेरा लॅंड बहुत मोटा है, तुम्हारी बुर फट जाएगी. अब क्या हो गया?” मैने यू ही प्रश्न किया.ओह जीजू, मुझे क्या मालूम था कि चुदाई मे इतना मज़ा आता है. आआआः अब और बर्दाश्ता नही होता.” साधना अपनी कमर को उठा-उठा कर पटक रही थी.हाई जीजू…. ऊऊऊः… आग लगी है मेरी चूत के अंदर .. अब देर मत कीजिए…. अब लॅंड घुसा कर चोदिये अपनी साली को… घुसेड दीजीये अपने लॅंड को मेरी बुर के अंदर… फट जाने दीजिए इसको ….कुछ भी हो जाए मगर चोदिये मुझे ” साधना पागलो की तरह बड़बड़ाने लगी थी. मैं समझ गया, लोहा गरम है इसी समय चोट करना ठीक रहेगा.

मैने अपने फनफनाए हुए कठोर लॅंड को उसकी चूत के छोटे से छेद पर अच्छी तरह सेट किया. उसकी टाँगो को अपने पेट से सटा कर अच्छी तरह जाकड़ लिया और एक ज़ोर दार धक्का मारा.अचानक साधना के गले से एक तेज चीख निकली. “आआआआआआआः. ..बाप रीईईई… मर गयी मई…. निकालो जीजू..बहुत दर्द हो रहा है….बस करो जीजू… नही चुदवाना है मुझे….मेरी चूत फट गयी जीजू… छोड़ दीजिए मुझे अब…मेरी जान निकल रही है.” साधना दर्द से बहाल होकर रोने लगी थी. मैने देखा, मेरे लंड का सुपाड़ा उसकी चूत को फाड़ कर अंदर घुस गया था. और अंदर से खून भी निकल रहा था. अपनी दुलारी साली को दर्द से बिलबिलाते देख कर मुझे दया तो बहुत आई लेकिन मैने सोचा अगर इस हालत मे मे उसे छोड़ दूँगा तो वो दुबारा फिर कभी इसके लिए राज़ी नही होगी.

मैने उसे हौसला देते हुए कहा. ” बस साली थोड़ा और दर्द सह लो. पहली बार चुदवाने मे दर्द तो सहना ही पड़ता है. एक बार रास्ता खुल गया तो फिर मज़ा ही मज़ा है” मैं साधना को धीरज देने की कोशिश कर रहा था मगर वो दर्द से छटपटा रही थी.मैं मर जाऊंगी जीजू… प्लीज़ मुझे छोड़ दीजिए…बहुत ज़्यादा दर्द हो रहा है.. प्लीज़ जीजू..निकाल लीजिए अपना लॅंड.” साधना ने गिड़गिदाते हुए अनुरोध किया. लेकिन मेरे लिए ऐसा करना मुमकिन नही था. मेरी साली साधना दर्द से रोटी बिलखती रही और मैं उसकी टाँगो को कस कर पकड़े हुए अपने लॅंड को धीरे धीरे आगे पीछे करता रहा. थोड़ी थोड़ी देर पर मे लॅंड का दबाव थोड़ा बढ़ा देता था ताकि वो थोड़ा और अंदर चला जाए. इस तरह से साधना तकरीबन 15 मिनट तक तड़पती रही और मैं लगातार धक्के लगाता रहा.

कुछ देर बाद मैने महसूस किया की मेरी साली का दर्द कुच्छ कम हो रहा था. दर्द के साथ साथ अब उसे मज़ा भी आने लगा था क्योकि अब वा अपने चूतड़ को बड़े ही लय-ताल मे उपर नीचे करने लगी थी.उसके मूह से अब कराह के साथ साथ सिसकारी भी निकालने लगी थी. मैने पूछा. “क्यो साली, अब कैसा लग रहा है? क्या दर्द कुछ कम हुआ?हा जीजू, अब थोडा थोड़ा अच्छा लग रहा है. बस धीरे धीरे धक्के लगाते रहिए. ज़्यादा अंदर मत घुसाईएगा. बहुत दुखाता है.” साधना ने हान्फ्ते हुए स्वर मे कहा. वह बहुत ज़्यादा लस्त पस्त हो चुकी थी.ठीक है साली, तुम अब चिंता छोड़ दो. अब चुदाई का असली मज़ा आएगा.” मैं हौले हौले धक्के लगाता रहा. कुछ ही देर बाद साधना की चूत गीली होकर पानी छोड़ने लगी.मेरा लॅंड भी अब कुछ आराम से अंदर बाहर होने लगा. हर धक्के के साथ फॅक-फॅक की आवाज़ आनी शुरू हो गयी. मुझे भी अब ज़्यादा मज़ा मिलने लगा था. साधना भी मस्त हो कर चुदाई मे मेरा सहयोग देने लगी थी. वो बोल रही थी.

अब अच्छा लग रहा है जीजू, अब मज़ा आ रहा है.ओह जीजू..ऐसे ही चोदते रहिए. और अंदर घुसा कर चोदिये जीजू..आ आपका लंड बहुत मस्त है जीजू जी. बहुत सुख दे रहा है. साधना मस्ती मे बड़बदाए जा रही थी.मुझे भी बहुत आराम मिल रहा था. मैने भी चुदाई की स्पीड बढ़ा दी. तेज़ी से धक्के लगाने लगा. अब मेरा लगभग पूरा लॅंड साधना की चूत मे जा रहा था मैं भी मस्ती के सातवे आसमान पर पहुच गया और मेरे मूह से मस्ती के शब्द फूटने लगे.हाई साधना.मेरी प्यारी साली.मेरी जान..आज तुमने मुझ से चुदवा कर बहुत बड़ा उपकार किया है..हा..साली..तुम्हारी चूत बहुत टाइट है..बहुत मस्त है..तुम्हारी चूची भी बहुत कसी कसी है.ओह्ह.बहुत मज़ा आ रहा है. साधना अपने चूतड़ उछाल-उछाल कर चुदाई मे मेरी मदद कर रही थी. हम दोनो जीजा साली मस्ती की बुलंदियो को छू रहे थे.

तभी साधना चिल्लाई.जीजू.. मुझे कुछ हो रहा है..आ हह.जीजू.. मेरे अंदर से कुछ निकल रहा है..ऊहह..जीजू..मज़ा आ गया..ह..उई..माअं.. साधना अपनी कमर उठा कर मेरे पूरे लॅंड को अपनी बुर के अंदर समा लेने की कोशिश करने लगी. मैं समझ गया की मेरी साली का क्लाइमॅक्स आ गया है. वह झाड़ रही थी. मुझ से भी अब और सहना मुश्किल हो रहा था. मैं खूब तेज-तेज धक्के मार कर उसे चोदने लगा और थोड़ी ही देर मे हम जीजा साली एक साथ स्खलित हो गये. बरसो से ईकात्ठा मेरा ढेर सारा वीर्य साधना की चूत मे पिचकारी की तरह निकल कर भर गया. मैं उसके उपर लेट कर चिपक गया. साधना ने मुझे अपनी बाँहो मे कस कर जाकड़ लिया. कुछ देर तक हम दोनो जीजा-साली ऐसे ही एक दूसरे के नंगे बदन से चिपके हान्फ्ते रहे. जब साँसे कुछ काबू मे हुई तो साधना ने मेरे होठ पर एक प्यार भर चुंबन लेकर पूछा.

“जीजू, आज आपने अपनी साली को वो सुख दिया है जिसके बारे मे मैं बिल्कुल अंजान थी. अब मुझे इसी तरह रोज चोदियेगा. ठीक है ना जीजू?” मैने उसकी चूचियो को चूमते हुए जबाब दिया. “आज तुम्हे चोद्कर जो सुख मिला है वो तुम्हारी जीजी को चोद्कर कभी नही मिला. तुमने आज अपने जीजू को तृप्त कर दिया.” वह भी बड़ी खुश हुई और कहने लगी आप ने मुझे आज बता दिया कि औरत और मर्द का क्या संबंद होता है. वह मेरे सीने से चिपकी हुई थी और मैं उसके रेशमी ज़ुल्फो से खेल रहा था. मैने साली से कहा मेरा लंड को पकड़ कर रखो. उसके हाथो के सपर्श से फिर मेरा लंड खड़ा होने लगा, फिर से मेरे मे काम वासना जागृत होने लगी.जब फिर उफहान पर आ गया तो मैने अपनी साली से कहा पेट के बल लेट जाओ. उसने कहा क्यू जीजू? मैने कहा इस बार तेरी चूतर मारनी है. वह सकपका गयी और कहने लगी कल मार लेना. मैने कहा आज सब को मार लेने दो कल पता नही में रहूं कीं आ रहूं. यह सुनते ही उसने मेरा मूह बंद कर लिया और कहा “आप नही रहेंगे तो मैं जीकर क्या करूँगी”.

वह पेट के बल लेट गयी. मैने उसकी चूतर के होल पर वसलीन लगाया और अपने लंड पर भी, और धीरे से उसकी नाज़ुक चूटर के होल मे डाल दिया. वह दर्द के मारे चीलाने लगी और कहने लगी “निकालिए बहुत दर्द हो रहा है”, मैने कहा सब्र करो दर्द थोड़ी देर मे गायब हो जाएगा. उसकी चूतर फॅट चुकी थी और खून भी बह रहा था. लेकिन मुझपर तो वासना की आग लगी थी. मैने एक और झटका मारा और मेरा पूरा लंड उसके चूतर मे घुस गया. मैं अपने लंड को आगे पीछे करने लगा. उसका दर्द भी कम होने लगा. फिर हम मस्ते मे खो गये. कुछ देर बाद हम झाड़ गये. मैने लंड को उसके चूतर से निकालने के बाद उसको बाँहो मे लिया और लेट गया. हम दोनो काफ़ी थक गये थे.बहुत देर तक हम जीजा साली एक दूसरे को चूमते-चाटते और बाते करते रहे और कब नींद के आगोश मे चले गये पता ही नही चला.

सुभह जब मेरी आँखें खुली मैने देखा साली मेरे नंगे जिस्म से चिपकी हुई है. मैने उसको धीरे से हटा कर सीधा किया, उसकी फूली हुई चूत और सूजी हुई चूतर पर नज़र पड़ी, रात भर की चुदाई से काफ़ी फूल गये थे. बिस्तर पर खून भी पड़ा था जो साली के चूत और चूतर से निकला था. मेरी साली अब वर्जिन नही रही. नंगे बदन को देखते ही फिर मेरी काम अग्नि बढ़ गयी. धीरे से मैने उसके गुलाबी चूत को अपने होंटो से चूमने लगा. चूत पर मेरे मूह का स्पर्श होते ही वह धीरे धीरे नीद से जगाने लगी, उसने मुझे चूत को बेतहासा चूमता देख शरम से आँखें बंद कर ली. समझ गयी फिर रात का खेल होगा फिर जीजा साली का प्यार होगा.

इसके 4 बाद तो साधना मेरी बीवी की तरह रहने लगी, जब उसके घर के लोग उसे ले जाने के लिए 3 महीने के बाद आए तो मैने उनसे कहा कि मुन्ना अब साधना के साथ बहुत मिल जुल गया है और साधना भी इस घर का सब कुछ समझ गयी है अगर आपको ऐतराज़ ना हो तो साधना को और कुछ दिन यही रहने दीजिए.. जब इसकी शादी पक्की हो तो इसे ले जाना. इस तरह साधना मेरे पास रुक गयी और एक साल के बाद मैने ही साधना से शादी कर लिया. अब तो साधना भी मा बनाने वाली है.

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