नेहा का परिवार , लेखिका: सीमा  part 3

नेहा का परिवार

लेखिका: सीमा

part 3

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बड़े मामा ने मुझे घास पर खड़ा कर दिया. मैं गुस्से से बोली, “बड़े मामा, आप को पता था कि वो लड़की मैं थी.”

बड़े मामा ने मुस्करा कर सिर हिलाया, “नेहा बेटी, तुम्हारी सुंदरता और प्यार ने मुझे बिलकुल निस्सहाय कर दिया. मनू की खिड़की के पास तुम्हे देख कर मुझसे और बर्दाश्त नहीं हुआ.”

मेरा दीमाग गुस्से से और इस नयी स्थिती से ठीक से सोच नहीं पा रहा था. मैं बड़े मामा की तरफ कमर कर खड़ी हो गयी. इस से पहले मैं कुछ बोल पाऊँ,बड़े मामा ने मुझे फिर से अपनी बाँहों में जकड़. उनके दोनों हाथों ने मेरे दोनों बड़े-बड़े उरोजों को ढक लिया. बड़े मामा ने धीरे-धीरे मेरे उरोजों को सहलाना शुरू कर दिया.

मेरी चूत में पानी भर गया. मेरा दिमाग ने बड़े मामा के हाथों के जादू के प्रभाव में नियंत्रण खो दिया. मेरी सोच-समझने की क्षमता पूरी तरह से समाप्त हो गयी. रही सही कसर बड़े मामा ने मेरे दोनों उरोज़ों को अपने बड़े-बड़े हाथों में दबा कर मुझे अपनी विशाल शरीर से भींच कर पूरी कर दी. मेरी साँसों में तूफान आ गया. बड़े मामा अपनी भरी पर प्यार भरी आवाज़ में बोले, “नेहा बेटा, यदि तुम्हें मनू की खिड़की के सामने पता होता कि वो आदमी मैं था तो फिर सब ठीक था? फिर तुम्हे यह सब स्वीकार होता?”

बड़े मामा के तर्क ने मुझे लाजवाब कर दिया और मैं अवाक रह गयी. बड़े मामा ने मुझे बचपन से अब की तरुणावस्था तक हमेशा अपनी बच्ची की तरह से प्यार किया था.

मैंने बड़ी मुश्किल से अपने गुस्से को अभिव्यक्त कर पाई, “बड़े मामा, मैं तो आपकी बेटी की तरह… आपकी अकेली बहन की बेटी,….भांजी हूँ.”

बड़े मामा ने मेरे बालों पर प्यार से चुम्बन दिया, उनके हाथ मेरे चूचियों पर और भी कस गए,”नेहा बेटा, मैं तुम्हारे अप्सरा जैसे स्वरुप से मुग्ध सम्पूर्ण रूप से विमोह में हूँ. यदि तुम चाहो तो इसे बुद्धिलोप कह सकती हो. अब मैं तुम्हरी चूत का ख्याल अपने दिमाग से नहीं निकाल सकता. मुझे तुम्हे चोदे बिना चैन नहीं पडेगा.”

मेरी सांस रुक-रुक आ रही थी. मेरे मस्तिष्क में विपरीत विचार मुझे दोनो तरफ खींच रहे थे.

“बड़े मामा, प्लीज़, मुझे थोडा समय दीजिये.मैं अभी बहुत उलझन में हूँ.” मेरी आवाज़ से स्पष्ट था कि मैं रोने वाली थी.

बड़े मामा का, जो हमेशा से मेरे पिता तुल्य थे,पितृवत् प्यार उनकी मेरे ऊपर कामलिप्सा से बहुत बलवान था. उन्होंने मुझे अपने बाँहों में उठा कर अपने गले से लगा लिया.मैं उनके गले को अपनी बाँहों से ज़क्कड़ किया और जोर से रोने लगी. मैं सुबक-सुबक कर रो रही थी. बड़े मामा ने मुझे अपने से िचपका कर मेरे कमरे की तरफ चल पड़े.

कमरे में उन्होंने मुझे धीरे और प्यार से बिस्तर पर लिटा दिया. मैं अभी भी ज़ोर-ज़ोर से रो रही थी. बड़े मामा भी बिस्तर में मेरे साथ लेट गए. मैंने उनकी तरफ पलट कर उन्हें अपनी बाँहों में भर उनसे लिपट गयी.

मैं बहुत देर तक रोती रही. बड़े मामा प्यार से मेरे बालों को सहलाते रहे. आखिर कर मैंने रोना बंद किया.

बड़े मामा ने मुझे सीधा लिटा कर अपना सिर अपने हाथ पर टिका कर प्यार से एकटक मेरे आंसू से मलिन चेहरे को देख रहे थे.

उनकी प्यार भरी आँखों में अपनी आँखे डालने के बाद मेरे चेहरे पर मुस्कराहट अपने आप आ गयी. मुझे अब पता चला कि मेरे बेतहाँ रोने से मेरी नाक भी बह रही थी.

बड़े मामा ने मेरी सूजी हुई आँखों को प्यार से चूमा. फिर उन्होंने मेरे पूरे मलिन चेहरे को अपने होठों और जीभ से बड़े प्यार से साफ़ कर दिया.

बड़े मामा ने अपनी जीभ से मेरी सुंदर नाक चूम और चाट कर साफ़ की. फिर उन्होंने अपनी झीभ की नोंक मेरी दोनों नथुनों के अंदर बारी-बारी से डाल कर मेरे नथुनों को साफ़ कर दिया. मैं अब खिलखिला कर हंस रही थी.

बड़े मामा ने मुझे अपनी बाँहों में भर कर धीरे-धीरे मेरे बालों को सहला कर सुला दिया. मुझे तो बहुत बाद में पता चला. बड़े मामा, जब मैं सो गयी, तो काफी देर तक मुझे सोते हुए देखते रहे. उनको मेरी गहरी नींद में मेरी ज़ोर की साँसें और मृदु खर्राटें सुन कर आत्मिक प्रसन्नता मिली.

मैं सुबह देर से ऊठी. मेरा मन बिस्तर से निकलने का नहीं हुआ. मैं जगी हुई बिस्तर में लेटी रही. करीब नौ बजे होंगे जब अंजू भाभी मेरे कमरे में मुस्कुराती हुईं दाखिल हुईं. वो अभी भी रात के गाउन में थीं. उन्हें देख कर मेरा चेहरा खिल ऊठा.

“नेहा, अभी तक बिस्तर में हो? क्या मुझे निमंत्रण दे रही हो? यदी चाहो तो मैं तुम्हारे जैसे प्यारी सुंदर नन्द को बहुत प्यार कर सकती हूँ. पर मेरा विचार है कि तुम्हे एक औरत की चूत नहीं एक बड़े मर्द का विशाल लंड चाहियें,” अंजू भाभी ने हमेशा कि तरह अश्लील भाषा में मज़ाक करने शुरू कर दिए.

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अंजू भाभी जल्दी से मेरे साथ बिस्तर में घुस गयीं. उन्होंने गाऊन के नीचे कोई ब्रा और जांघिया नहीं पहन रखा था.

अंजू भाभी ने मुझे अपने बाँहों में भर लिया. उन्होंने फिर बहुत प्यार से मेरे मूंह का चुम्बन लिया. अंजू भाभी भी अभी-अभी बिस्तर से निकली थीं और उन्होंने सुबह-सवेरे की कोई सफाई नहीं की थी. उनके मूंह में, मेरे मूंह के जैसे, रात के सोने बाद का मीठी सुगंध और मीठा स्वाद था.

“नेहा, क्या तुमने मनू को नीलम कि चुदाई करते हुई देखा?” अंजू भाभी सर्वज्ञ मालूम होतीं थीं.

मैंने शर्म से भरे लाल चेहरे से मनू भैया और नीलम भाभी के पहली चुदाई का विस्तृत रूप से वर्णन दिया. मैंने बड़े मामा से मिलने का कोई संकेत नहीं दिया. अंजू भाभी ने मुझे न जाने कितनी बार मुझे होठों पर चुम्बन दिया.

“नेहा, क्या तुम्हारा दिल नहीं करता, एक मूसल जैसे बड़े लंड से चुदवाने का?” अंजू भाभी हमेशा से मेरे साथ अश्लील, सम्भोग की बातें करती थीं.

मेरे चेहरे पर रात की बात याद आते ही शायद थोड़ी सी उदासी छा गयी थी. मैंने धीरे से सिर हिला कर हांमी भर दी.

“नेहा, जब तुम चाहो मुझे बता देना. मैं तुम्हारे नरेश भैया से तुम्हारी चुदाई का इंतज़ाम करवा दूंगीं.”

नेहा के आखें बहर निकल पड़ीं, “भाभी, क्या कह रही हो? भैया और मैं एक दुसरे को चोदेंगें ?”

अंजू भाभी ने प्यार से मेरी नाक के ऊपर चुम्बन दिया,”बहन-भाई, यह सब बकवास है. यह पिछड़े हुए दकियानूसी रुकावटें है प्यार के रास्ते मैं. यदि मैं अपने सिर्फ अपने भाई से ही शादी करना चाहती तो यह समाज मुझे रोक सकता था? नहीं. मैं और मेरे भैया दूर कहीं जा कर अपनी गृहस्थी बसा लेते. जैसे मैंने पहले बोला, नेहा, समाज के प्रतिबन्ध केवल बेवकूफ लोगों के लिये होतें हैं.”

अंजू भाभी ने मेरी पूरे नाक अपने मूंह में लेकर बड़े प्यार से उसे चूसा. फिर अपनी जीभ मेरे दोनों नथुनों में डाल कर अपने थूक से मेरी नाक भर दी. मैं खिलखिला कर हंस रही थी.

“नेहा, सच में. जब तुम तैयार हो मुझे बता देना. तुम्हारे नरेश भैया अपने को खुशकिस्मत समझेंगें यदि तुम उनसे अपनी चूत मरवाने का निर्णय करोगी.” अंजू भाभी ने मुझे प्यार से चूमा और नाश्ते के लिए तैयार होने के लिये कह कर खुद तैयार होने के लिए अपने बंगले की तरफ चल दीं.

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मैं नहा-धो कर तैयार हो गयी. मैंने एक हलके नीले रंग का कुरता और सफ़ेद सलवार पहनी. मैंने कुरते के नीचे ब्रा नहीं पहनी क्योंकी मेरी चूचियां बड़े मामा से कल रात मसलवाने के बाद अभी भी दर्द कर रहीं थीं. मैंने चुन्नी लेने की की ज़रुरत भी नहीं समझी. नाश्ते के लिए जाते वक़्त जब मैं लम्बे गलियारे में थी तो किसीने मुझे पीछे से पकड़ कर नज़दीक के कमरे में खींच लिया. अब मुझे समझने मे कुछ ही क्षण लगे की ऐसा तो सिर्फ एक व्यक्ती ही कर सकते थे. और वास्तव में मेरे बड़े मामा ही ने मुझे खींच कर खाली कमरे मे अंदर ले गये. मेरी साँसे तेज़-तेज़ चलने लगी. मामाजी ने मेरी दोनों उरोज़ों को अपने बड़े-बड़े हाथों से ढक लिया. मैंने अपने शरीर को उनके बदन पर ढीला छोड़ दिया. मेरे पितातुल्य बड़े मामा ने मेरे दोनों उरोज़ों को पहले धीरे-धीरे सहला कर फिर काफी जोर से मसलना शुरू कर दिया. हम दोनों ने अब तक एक भी शब्द नहीं बोला था. मेरी तरुण अवयस्क शरीर मे वासना की आग फिर से भड़क उठी. मेरी आँखें कामंगना के उद्वेग से अपने आप बंद हो गयीं. मेरी सांस अब बहुत ज़ोर से चल रही थी. बड़े मामा ने कुरते के ऊपर से ही मेरे दोनों उरोज़ों की घुन्दीयाँ अपने अंगूठे और पहली उंगली के बीच मे दबा कर उनको उमेठने लगे. मेरे मूंह से अविराम सिस्कारियां निकालने लगीं.

बड़े मामा का एक हाथ मेरी चूची को अविराम मसलता रहा. उनका दूसरा हाथ मेरे कुरते को ऊपर खींचने लगा. उन्होंने मेरे कुरते को पेट तक उठा कर मेरे मुलायम गुदाज़ उभरे हुए पेट की कोमल खाल पर अपने हाथ फिराने लगे. उनका हाथ धीरे-धीरे मेरी सलवार के नाड़े तक पहुच गया. मेरा हृदय अब रेल के इंजन की तरह धक-धक रहा था. मैं वासना के ज्वार मे भी डर रही थी की कोई हम दोनो को इस अवस्था मे पकड़ ना ले. मेरे मुंह से बड़े मामा को रोकने के लिए शब्द निकल कर ही नहीं दिये.

बड़े मामा ने मेरी सलवार का नाड़ा खोल दिया और मेरी सलवार एक लहर मे मेरी टखनों के इर्द-गिर्द इकट्ठी हो गयी. मामाजी ने मेरे सफ़ेद झान्घिये के अंदर अपना हाथ डाल दिया. मैं शरीर मे एक बिजले सी कौंध गयी. मामाजी की उँगलियों ने मेरे घुंघराले झांटों से खेलने लगीं. मेरी दिल की धड़कन अब मेरे छाती को फाड़ने लगी. मेरी सांस अब रुक-रुक कर आ रही थी. मामाजी ने अपनी उँगलियों से मेरी चूत के भगोष्ठ को भाग कर मेरी चूत के मूंह पर अपनी उंगली रख दी. उनकी उंगली ने धीरे से मेरे बिलकुल गीली चूत के अंदर जाने का प्रयास किया.मैं दर्द और घबराहट से छटपटा उट्ठी.मामाजी ने अपनी उंगली को हटा कर मेरे भागान्कुर को सहलाने लगे. मेरा शरीर फिर से ढीला होकर मामाजी के शरीर पर ढलक गया. मामाजी ने कल रात की तरह मेरे चूत की घुंडी को अपनी उंगली से सहलाना शुरू कर दिया. मेरी चूत मे से लबालब रतिरस बहने लगा. मामाजी ने एक हाथ से मेरी चूची को मसला और दुसरे हाथ से मेरी भग-शिश्न को कस कर मसलना शुरू कर दिया. मेरे तरुणावस्था की नासमझ उम्र मे मेरी वासना की कोई सीमा नहीं थी. मैं अपने चरम-आनन्द की प्रतीक्षा और कामना से और भी उत्तेजित हो गयी. बड़े मामा के अनुभवी हाथों और उँगलियों ने मुझे कुछ ही देर मे पूर्ण यौन-आनन्द के द्वार पर पहुंचा दिया. मेरी चूत का पानी मेरी झंगों पर दौड़ रहा था. मेरी कामुकता अब चरम सीमा तक पहुँच चुकी थी. मेरे कुल्हे अब अबने-आप आगे-पीछे होने लगे. मेरी हलक से एक छोटी सी चीख निकल पडी. मेरे बड़े मामा ने मेरी चूत को अपने हाथों के जादू से मेरे आनन्द की पराकाष्ठा को मेरे शरीर मे एक तूफ़ान की तरह समाविष्ट कर दिया. मेरी चूत मे से एक तीखा दर्द उट्ठा और मेरी दोनों उरोज़ों मे समा गया. मुझे लगा जैसे मेरी पेट मे कोई तेज़ ऐंठन है जो बाहर निकलना चाह रही है.

अचानक मेरा शरीर बिलकुल ढीला पड़ गया. मेरे घुटने मेरा वज़न उठाने के लिए अयोग्य हो गये. मेरे कामोन्माद के स्खलन ने मुझे बहुत क्षीण सा बना दिया. मामजी ने मुझे अपनी बाँहों मे लपेटे रखा. जब मुझे थोडा सा होश आया तो उन्होंने बिना कुछ बोले मुझे अपनी बाँहों से मुक्त कर कमरे से बाहर चले गये.

मैं बहुत देर तक अपनी उलझन भरी अवस्था मे अर्धनग्न खाली कमरे मे खड़ी रही. फिर मैंने धीरे-धीरे थके ढंग से अपनी सलवार ऊपर खींच कर नाड़ा बांधा. मैं थोड़ी देर चुपचाप अकेले खड़ी रही. फिर मैं तेज़-तेज़ क़दमों से डाइनिंग-रूम की तरफ चल पडी.

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डाइनिंग-रूम मे सब बैठ चुके थे. मैं नानाजी के पास खाली कुर्सी पर बैठ गयी. थोड़ी देर मे मेरे नानाजी ने अपने प्यार भरी बातों से मुझे हंसा-हंसा कर मेरे टेट मे दर्द कर दिया. नानाजी ने मुझे मेरे हाथ से अपनी तरफ खींच कर अपनी गोद मे बैठा लिया. मैं छुटपन से खाने के वक़्त ज़िद कर के नानाजी और दादाजी की गोद मे बैठती थी. मेरी नयी उलझन भरी अवस्था मे नानाजी के विशाल शरीर की शरण में मुझे बहुत शांती का आभास हुआ. मैंने अपने नानाजी की गर्दन पे अपनी बाहें डाल दीं. मैं अपने हाल ही के यौन चरमोत्कर्ष की थकान और नानाजी की गोद के आश्वासनपूर्ण आश्रय के प्रभाव से बोझल हो गयी और मेरी दोनों आँखें नींद से भर गयी. मुझे तो पता नहीं चला पर मेरा बहुत मज़ाक बनाया गया पर मेरे नानाजी ने सबको चुप कर मुझे अपने बाँहों मे भर कर सोने दिया.

मेरी आँख जब खुली तो मैं फिर से अपने बिस्तर मे थी. मैं शर्म से लाल हो गयी. ज़ाहिर था की नानाजी ने मुझे बाँहों मे उट्ठा कर मुझे मेरे बिस्तर में लिटा कर सोने के लिए छोड़ गये थे.

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मैं उठ कर मुंह धो कर परिवार की बड़ी बैठक में चली गयी. मनू भैया और नीलम भाभी अपने मधुमास [हनीमून] के लए विदा होने वाले थे. दोनों दो महीनों का पूरे संसार का चक्कर लगाने के लए रवाना हो रहे थे. भैया और भाभी ने मुझे गले लगा कर प्यार से चूमा.

सारे परिवार के लोग कई कारों में भरकर दोनों नवविवाहित जोड़े को विमानघर छोड़ने के लिए चल पड़े.

वापसी में मैं बड़े मामा की कार में थी. हम दोनों पीछे की सीट पर थे. ड्राईवर ने बीच का अपारदर्शी शीशा चड़ा रखा था.

मैं शर्म के मारे लाल हो गयी. बड़े मामा ने मुस्करा के मेरी तरफ देखा, “नेहा बेटा, क्या आप मेरी गोद में नहीं बैठेंगी?” बड़े मामा मुझे चिड़ा रहे थे.

“मामाजी, आप बहुत गंदे हैं,” मैं कृत्रिम उपहास भरे क्रोध से बोली, “आप मुझे कितना सता रहें हैं.”

बड़े मामा पहले हँसे फिर धीरे से बोले, “नेहा बिटिया, जितना भी आपको लगता है कि मैं सता रहां हूँ, मैं उससे ज्यादा यातना सह रहा हूँ. आपको देख कर मेरी इच्छा होती है कि आपके सारे कपडे फाड़ कर आपको बिस्तर पर पटक कर आपकी चूत में अपना खड़ा लंड घुसेड़ कर सारा दिन और सारी रात आपकी चूत और गांड मारूं.”

मेरी साँसे मानो मेरे नियंत्रण से बाहर हो गयीं. बड़े मामा के अश्लील सहवास के वर्णन से मेरी कामाग्नी फिर से जागृत हो गयी. मैं शर्म से लाल हो गयी और सिर नीचे झुका लिया. सदियों से स्त्री की इस अवस्था का आशय पुरुष की वासना के सामने आत्मसमर्पण करने के लए तैयार होने का था. बड़े मामा ने मेरी लाज भरी अवस्था का अर्थ भी मेरे सम्पर्पण के निर्णय से संलग्न कर लिया.

बड़े मामा ने मुझे अपनी शक्तिशाली बाँहों में उट्ठा कर अपनी गोद में बिठा लिया. कुछ ही क्षणों में उनका खुला मुंह मेरे खुले मूंह पर कस कर चपक गया. बड़े मामा की झीभ मेरे मूंह में सब तरफ हलचल मचा रही थी. मेरे मामा का थूक मेरे मुंह ने बह रहा था. मुझे अपने बड़े मामा का थूक सटकने में बहुत आनंद आया. उनके हाथ मेरे दोनों उरोज़ों को सताने में व्यस्त हो गये. मेरे गुदाज़ चूतड़ उनकी गोद में मचलने लगे.

‘बड़े मामा,आप कब तक मुझे ऐसे तरसाते रहेंगें?” मेरी कमज़ोर सी धीमी आवाज़ मेरे मुंह से मीठी सी शिकायत के साथ निकली.

“नेहा बेटा, जब आप हमें अपनी इच्छा के बारे में विश्वास दिला देंगें.” बड़े मामा ने ज़ोर से दोनों उरोज़ों को दबा कर मेरे नाक का चुम्बन ले लिया,”तब हम दोनों की यातना का समाधान हमारे पास है.”

“किस इच्छा का विश्वास चाहिए आपको?” मैं थोड़ा इठला के बोली. मैं अब बड़े मामा की वासना की शिकार हो चुकी थी. मैंने अब अपने आपको बड़े मामा के आगे सम्पर्पण करने का निर्णय ले लिया था.

“आप हमें बतायें, बेटा, हम किस इच्छा की बात कर रहें है?” बड़े मामा मेरे मुंह से खुले रूप से हम दोनों की कामवासना का विवरण सुनना चाहते थे.

मेरी शर्म के मारे आवाज़ ही नहीं निकली. बड़े मामा ने मेरे दोनों चूचियों को बहुत ज़ोर से मरोड़ दिया. मेरी हल्की सी चीख निकल गयी.

“नेहा बेटी, जब तक आप हमें नहीं बतायेंगें कि हम दोनों की इच्छा क्या हैं तब तक हम दोनों की यातना का कोई हल नहीं निकलेगा.” बड़े मामा ने मुझे बिलकुल निरस्त कर दिया.

मैं मारी आवाज़ में धीरे से बोली, “बड़े मामा आप हमें चोदना चाहतें हैं. आप हमारी चूत में अपना लंड डालना चाहतें हैं.”

बड़े मामा हल्के से हँसे, “नेहा बेटा, क्या आप यह सब नहीं करना चाहते?”

मेरे मस्तिष्क में तूफ़ान सा उठ चला, “बड़े मामा, हम भी आप से अपनी चूत मरवाना चाहते हैं. मुझे भी आपका लंड देखना है. मैं भी आपके लंड से अपनी चूत मरवाऊंगी.”

बड़े मामा ने मुझे अपनी बाँहों में भींच कर कार की सीट पर लिटा कर अपने नीचे दबा लिया. पूरे रास्ते बड़े मामा ने मुझे चूमा और मेरे दोनों उरोज़ों का बेदर्दी से मंथन किया.

“पर मामाजी हमें इस को करने का अ..अ… चोदने का मौका कैसे मिलेगा?” आखिर में मेरी वासना ने अगम्यागमन की सामाजिक-वर्जना के डर के ऊपर विजय पाली.

“नेहा बेटा, वो आप मुझ पर छोड़ दो. जब मैं आपको इशारा करूँ आप मेरी योजना को अपनी सहमती दे देना.” बड़े मामा ने मेरे उरोज़ों को मसलते और मेरे होठों को चूमते हुए मुझे विश्वाश दिया.

घर के नज़दीक पहुँच कर ही मामाजी ने मुझे अपनी सलवार-कुरता सँवारने दिया.

यदि कोई मेरी तरफ ध्यान दे रहा होता तो, कार में बड़े मामा ने मेरे साथ क्या किया, मेरा शर्म से लाल चेहरा उसकी सारी दास्तान बता रहा था.

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SEEMA

I write erotic Hindi stories mostly based on Incest. Key theme, however, is love. I do not condone and base my stories on exploitation or coercion. This is a long story and already complete. If early posts hold good rest will come swiftly. There are more in pipeline.