शीलहरण का अड्डा

मैं कोकलाप्रसाद शास्त्री, 59 वर्ष, नई दिल्ली।

मैंने पिछली बार बताया कि हमारे दफ्तर में 18 मर्द और 9 महिलाएं / स्त्रियाँ / नारियां काम करती हैं।। इन नारियों अर्थात कामिनियों में से 4 का मैंने परिचय दे दिया था कि मैंने किस तरह से इन चार का मजा लिया। बाकी बची पाँच? क्या मैंने उनको छोड़ दिया? अजी नहीं; मैं भला कैसे छोड़ दूंगा। उनमें से एक का नाम है रमालक्ष्मी, यह चटक गौरी, उम्दा किस्म की छोकरी है; उम्र 17 साल। दूसरी कन्या का नाम है — कुमकुम जो सिर्फ 16 साल की है। दो 15 और 14 साल की हैं; और एक 42 साल की, विधवा या रंडी; नाम मालतीबाई मोटाटकर। मेरे यहाँ आने से पहले ये यहाँ अफसर थी। दफ्तर के 18 मर्दों में सब एक उम्र के नहीं थे। कुछ कमसिन उम्र के लौंडे या किशोर थे। इनमें से एक 16 साल के किशोर पर मालतीबाई का दिल आ गया। उसने पहले तो उसे अपना बेटा बनाया, वो छोकरा सब के सामने मालती को अम्मा-अम्मा, मॉम-मॉम, मां-मां कहता पर मालतीबाई ने उसे ऐसी ट्रेनिंग दी की वो मादरचोद बन गया। मालतीबाई भी यही चाहती थी सो एक रात, रात भर उस नटखट बेटे ने अपनी मां मालतीबाई को चोदा; सिर्फ चोदा ही नहीं उसकी गांड भी मारी, मालतीबाई भी नखरे से चिल्लाई— ” शाबाश, बेटा! मार, मार, अपनी मां की गांड मार!!! । सो ये मालतीबाई भी मेरी तरह कामुक और मर्दखोर थी और है। इसलिए मेरे लिए ये बहुत जरूरी हो गया कि मैं इसे पटाऊँ, इसके सहयोग से कन्या और रमणी- चुदाई का खेल खेलूँ।

फिर मैंने मालतीबाई को पटाना शुरू किया और पटा लिया। दफ्तर के लोग-लुगाई मुझे मालतीबाई का अवैध पति अर्थात खसम मानते थे। हम दोनों की जोड़ी थी। गलत भी नहीं था। मैं मालतीबाई के लिए चिकने और कमसिन, शुद्ध 16 साल के नए-ताज़े कमसिन लौंडे लाता, वे उसे मां-मां कह कर चोदते। उनमें से जब कोई एक मालती अम्मा की 42-साल की लसदार चूत में जीभ घुसेड़ चाटते उस समय या बाद में जब मालतीबाई खुद नमकीन लौंडे का लंड पकड़ अपनी लिजलिजी चूत में डालती, और लड़का उसे मां-मां कह कर चोदता उस वक्त मैं भी उस कमसिन लड़के की गांड मारता।

इस दफ्तर की कन्याओं / लड़कियों / युवतियों से मेरा मन लगभग भर गया था। मुझे जरूरत थी एक नए अड्डे की जहां ज्यादा माल हो और खुल्ला खेल हो। मैंने सुना था कि बेंगकोंग या होंग -कोंग में ऐसे अड्डे हैं जहां कन्याओं / रमणियों का कुत्सित मज़ा ले-ले कर मांस निचोड़ा जाता है और मैं वैसा ही मज़ा इंडिया में लेना चाहता था। जब मालतीबाई को ये योजना बताई और लालच दिया — जमीन के प्लॉट का, आलीशान कार व रिहायशी फ्लेट का —- तो वो इस काम को अंजाम देने राज़ी हो गई। जिस दिन वो इस क्रियाकर्म के लिए राजी हुई उस रात मैंने मालतीबाई का माल झंझोड्ने का उम्दा प्रबंध किया। 16-17-18 की उम्र के छह छोकरों को बुलाया जो मादरचोद-उस्ताद थे, वे सब मालतीबाई पर मां-मां चिल्लाते हुए चढ़ गए — दो उसके मुंह में लंड मारने लगे, दो उसकी चूत में एक-वक्त एकसाथ। और दो बारी-बारी हंस-हंस कर उसकी गांड मारने लगे। कोई बंदर की तरह उछल रहा था तो कोई रीछ की तरह। छहों ने मालतीबाई को उलटते-पुलटते हुए उसे रगड़ा। कोई उसके मम्मे गूँधता, कोई गाल चबाता, कोई पेट टटोलता, कोई सिर के बाल खींच गालों पर झापड़ जड़ता। मैं यह तमाशा देख रहा था और मेरे मुंह से निकला ”मोगाम्बो खुश हुआ! ”।

मालतीबाई के काम में मदद करने के लिए मैंने एक 38 वर्ष की और एक 40 वर्ष की लेडी का इंतजाम किया। इन दोनों का बेकग्राउंड पुलिस का था, वहाँ से हटवा कर इस लाइन में इन्हें लगाया। इन्हें नेपाल भेजा जहां से ताज़ा माल भारत आता है। हमने सेक्स लाइना के शौकीनों से राय ली तो वो बोले बहुत मोटे ताज़े, लंठ , पहलवान जैसे मोटे, भीमकाय मर्द खास तरह की पिलपिली और कमजोर लड़की पसंद करते है; कम उम्र के छोकरे ज्यादा उम्र की मगर भारीभरकम वजन की छोकरी चाहते हैं। लोगों के शौक बदल गए हैं। सेक्स पर्यटन का अड्डा खोलना है तो बहुत ध्यान लगाना होगा। नस्ल, कद-काठी, लंबाई-ऊंचाई, रंग-रूप सब देखना है। डेनमार्क और जापान से सीखना है कि सेक्स का मज़ा कैसे लिया-दिया जाता है। भारत में नाइजीरिया के नीग्रो लोगों की बस्ती है जो गां\ड़ मारने के लिए खास हुलिये-लिबास की मदमस्त लड़की चाहते हैं। फिर अरब अमीरात के शेख भी है जो ग्रुप चुदाई चाहते हैं। अफगान पठान चिकने लौंडे और कमसिन कन्याएँ पसंद करते हैं। फिर नारी स्वातंत्र्य-नारी जागरण का युग है तो lesbian / समलिंगी छोकरियाँ भी चाहिए। तय हुआ कि उम्र के लिहाज से 14-17, 18-24, 32-38, 42-48 तक की उम्र की कन्याएँ / लड़कियां / स्त्रियाँ / कामिनियाँ, आदि छांट और चख कर रखी जाएंगी। माल छांटने का जिम्मा मालतीबाई एंड कंपनी का और चखने / ट्रेनिंग देने का जिम्मा मेरा अर्थात कोकलाप्रसाद कोकशास्त्री का!

कार्य में बहुत प्रगति तो नहीं हुई पर कन्या / कामिनी शीलहरण का कामचलाऊ अड्डा जमने लगा। इसे शहर से बहुत दूर एक फार्म हाउस में खोला गया जहां पहुँचने के लिए नई दिल्ली से गाड़ियों का प्रबंध था। देसी कमजोर दिल लोगों के लिए सवस्त्र अश्लील नाच की स्टेज थी। यहाँ कपड़े पहने हुए मदकामिनियाँ संगीत की धुन पर अश्लीलता का जलवा बिखेरती। ये बालाएँ अपनी छिपी चूत व गांड को लचका-मचका और उछल-उछल मज़ा देती, चेहरे पर मुग्ध कर देनेवाले अश्लील इशारे और आँख मारने का खेल भी।

लेकिन खास प्रबंध खुल्ली मजबूत नंगी चुदाई का था। इस लाइन में नेपाल की शशिबाला मेरी पहली पसंद थी और इसे नंगी ट्रेनिंग देना भी मेरी ज़िम्मेदारी थी। यह छोकरी 4 फीट 11 इंच की थी, फिगर 32 23 32, वजन 33 किलो, चेहरा मासूम पर सेक्सी; उम्र सिर्फ 14 वर्ष। यह पहले धंधे में नहीं थी पर इसकी मां थी इसलिए ये ट्रेनिंग मैंने इसे इसकी मां के सामने ही दी। ट्रेनिंग में इसकी मां की ड्यूटी थी कि वो मुझे अपने हाथों से मेरे वस्त्र हटा मुझे नंगा करे, जो उसने किया। यह वो छोकरी शशिबाला देख रही थी। जब मैं मादरजात खुल्ला-नंगा हो गया तब इस छोकरी ने देखा और इसकी मां ने भी कि मेरे मोटे अंडकोश और मोटे लंड के इर्दगिर्द घनी झांटों का झुरमुट था। झांटों का एक-एक बाल सुगंधित तैल लगा कंघी किए हुए था। अब मेरी बारी थी कि मैं शशिबाला को नंगी करूं। मैंने पहले उसके टॉप्स हटाये, नीचे ब्रा नहीं थी, और मम्मे कच्चे, कम उठे हुए। यह माल देख मेरी लार टपक पड़ी। उसकी मां भी बोली,” हजूर, माल अच्छी तरह चख लो,’ तब मैंने उसके नन्हें मम्मों पर मुंह मारा और चबड़-चबड़ आवाज करते हुए उसके मम्मों को हाथों से नोंच मुंह मे भर लिया। फिर मैंने छोकरी का ढीलाढाला स्कर्ट उसकी पतली मृदुल कमर से नीचा खिसकाया, और लो! मुझे उसकी कमसिन व नन्ही चूत की दर्शन हो गए। मैं नीचे झुका, लड़की की टांगें चौड़ी की और टांगों के बीच आई संकरी दरार देखने लगा। मेरा मुंह दरार के आरपार हो गया। छोकरी की आँखें खुली की खुली थी और उसे जरा भी शरम नहीं आई। फिर मैंने उसे मूतने को कहा तो थोड़ी देर बाद उसने मूतना शुरू किया; उस वक्त मैने भी मूतना चालू कर दिया, कुछ इस तरह से कि हम दोनों के मूत आपस में मिल एक हो गए। छोकरी का चेहरा तब भी सपाट, खामोश, और प्रसन्न पर मासूम रहा। फिर जैसा कि मेरी हविश है मैं उसकी प्यारी नंगी गांड की तरफ लपका। उसकी प्यारी-प्यारी गांड पर चिकोटी काटी, और उसकी मां से बोला– ‘ माल तो बढ़िया है! ‘। मैंने दुबारा से उसकी गांड को हल्के-हल्के सहलाना शुरू किया, फिर गूंधना। मैंने महसूस किया कि गांड का मांस गरम था। उसकी गांड का छेद बहुत छोटा था और वह दिख भी नहीं रहा था तब उसकी मां ने खुद उसकी गांड खोल कर छेद दिखाया। बहुत गुलाबी था वो छेद! मैंने उसमें अंगुली की तो वह छोकरी चिहुंकी। लेकिन मेरा पाला काम लड़की की गांड मारना होता है, इसलिए मैंने उसकी मां को कहा कि हमारे पास नीग्रो हबशी आते हैं और वे पहले इसकी गांड मारेंगे, जबकि इसकी गांड का छेद ही छोटा है, तो इसे कड़ी ट्रेनिंग तो देनी होगी। मैंने दुबारा उसकी गांड खींच कर ज़ोर से चौड़ी की और अपना लौड़ा छेद में फँसाने लगा। मगर लंड का सोपारा अंदर नहीं घुसा। फिर मैने एक बड़ी मोमबत्ती मंगाई और उसकी मां से बोला– ‘बहन जी अब तो इसकी गांड में इसे धंसाना ही पड़ेगा भले ही तुम्हारी बिटिया को दर्द हो’। कुछ पहलवानी की तो मोमबत्ती उसकी गांड के छेद में सफलता से घुस गई। मैंने दुबारा निकाला और तुरंत वापस घुसाया, कोई 25-बार करने पर छोकरी की गांड का छेद कुछ खुला। मुझे यकीन हो गया कि अगर सख्ती से पूरी रात मैं इसकी गांड के साथ अपने लौड़े को फँसाने का काम ताकत से करूंगा तो फतेह हो जाएगी। मैने इस छोकरी को रिजर्व रख लिया।

दूसरी छोकरी काफी मोटी-ताजी, हृष्टपुष्ट, पहलवान टाइप की थी। वह जीन्स पहने थी जिसमें उसके चूतड़ उट्ठे हुए नजर आ रहे थे, उसके मम्मे भी भारी थे और कमर भी। पेट देख कर ऐसा लगा जैसे वो गर्भवती हो पर वो बात नहीं थी। मैंने ज़ोर से उसका पेट दबाया और गांड़ के उठान को दो -फीट के डंडे से पीटा– ठक-ठक ठोक-ठोक। इसकी उम्र 20 वर्ष की थी।

तभी मालतीबाई मोटाटकर दो तरुणी स्त्रियॉं के साथ प्रकट हुई। दोनों सेक्स की फुलझड़ी थी पर एक फर्क के साथ। एक नव-प्रसूता थी, अर्थात उसके पेट से बच्चा जन्मे सिर्फ दो महीने हुए थे; और दूसरी पाँच महीने की गर्भवती थी। दोनों की उम्र 23 व 21 साल की थी। एक का नाम रमला था तो दूसरी का नाम पियारी। यह पक्की बात है कि ऐसा माल लाने में मालतीबाई को मेहनत खूब करनी पड़ी होगी ; दोनों को चुदने के लिए राजी करना बड़ी बात थी। नव-प्रसूता छरहरी और कंचन-केशर रंग की गोरी चिट्टी ललना थी; गर्भवती भी गोरी थी पर भारी बदन की। मुझे सबसे पहले यह देखना था कि दोनों की चूत कैसी है। इसे मैंने पहले नंगी आंखों से और फिर आतशी शीशे (magniflyimg ग्लास) से देखा और तसल्ली की। नव-प्रसूता की सिजेरियन डिलिवरी हुई इसलिए उसकी चूत भी कसी हुई और ताजी थी। एक की चूत पान के पत्ते सी थी, दूसरी की नीम के पत्ते सी थी; दोनों की चूत क्लीन शेव की हुई, मुलायम थी।

सबसे पहले मुझे नव-प्रसूता को परखना था कि उसके मम्मों से दूध की धार कितनी तेजी से निकलती है। नव-प्रसूता का नाम रमला था और वह इस वक्त अपनी सास के साथ थी। उसकी सास कोई 45 वर्ष की थी पर थी सेक्सी माल। मालतीबाई मोटाटकर ने उसे कुछ और रुपयों के बंडल थमाए तो वो खुद ही अपनी बहूरानी से बोली, ‘चल नंगी हो जा, सेठ तेरी चूत देखेंगे। ‘ इस पर मैं आगे आया और बहुत धृष्टता से बोला– ‘ इसकी करारी चूत तो हम देखेंगे ही और फिर चोदेंगे, मगर तुम कौन सी कम हो, तुम्हारी भी चूत देखेंगे। इस पर रमला की सास का मुंह शर्म से नीचा हो गया, सास का नाम था मैनावती। मैंने कहा– ‘ सोच लो, अच्छे पैसे मिलेंगे, वारेन्यारे हो जाएंगे। जब तुम अपनी छोटी सुकुमार बहू को इस लाइन में उतार सकती हो तो तुमको चुदने में क्यों शरम? आजा मैना, मैं तुम्हें और तुम्हारी दुग्धवती बहूरानी को साथ-साथ चोदूंगा! आजा, मेरी जान! । ‘ मालतीबाई ने भी सास को समझाया तो वो तैयार हो गई। अब मुझे सास-बहू दोनों को रगड़ना था।

पर पहले बहूरानी। मैं रमला को अलग कक्ष में ले गया, मैंने उसके मम्मे ज़ोर से गूँधे और फिर एक चूँची मुंह में भर चूंघने चसकी लगाने लगा तो दूध की ताज़ा धार छलछला आई। फिर मैंने बहूरानी की चूत छेड़ी , उसकी गांड़ की तरफ से हाथ निकाल कर। चूत अभी भी कड़क और कसी हुई थी। फिर मैंने उसकी सास को बुलाया और बहूरानी के सामने ही मैनावती की गांड़ से छेड़छाड़ शुरू कर दी। मैना की गांड़ मोटीताजी थी। मैं उसकी गांड पर चढ़ने का प्रयास कर रहा था जबकि उसकी बहूरानी यह नज़ारा टुकुर-टुकुर देख रही थी। मेरे दिमाग में एक आइडिया था। अगर हम जो सेक्स शो करेंगे उसमें क्या रमला बहूरानी अपनी सासू-मां मैनावती की strep-on से गांड मार पाएगी; ये आइडिया मैंने मन में ही रखा। अभी मुझे गर्भवती की भी परीक्षा लेनी थी कि वो कितनी गरम है।

गर्भवती का नाम था पियारी, पियारीबाई। खुद मेरा पेट आगे आया हुआ था इसलिए पहले तो मैंने उसके पेट से अपना पेट भिड़ाया। फिर उसका फूला हुआ पेट गौर से देखा। दबाया। तसल्ली होने पर जांघें देखी, पुष्ट। असल चीज थी चूत : वह सही थी। गर्भवती को चोदने में अलग आसन जमाना पड़ता है ताकि चूत की चुदाई भी हो जाय और गर्भ को नुकसान भी न हो। शास्त्रों में तो ये भी लिखा है कि गर्भवती को जरूर से जरूर चोदना चाहिए, पीछे से, Doggy स्टाइल से। पियारीबाई भी एकदम अकेली नहीं थी, उसके साथ उसकी एक भाभी थी। वह भी बच्चेवाली थी, उसका बड़ा बच्चा दस साल का व छोटी बच्ची सात साल की थी; नाम कलावती था। कलावती मुझसे बोली: ‘सेठ जी यह माल आपको और जगह नहीं मिलेगा। पहली बार पेट से है! ‘सही कहा, क्योंकि उसके चेहरे पर सही सेक्सी नूर था, वाह पियारी, प्यारी-प्यारी।

मैंने घूमा-फिरा कर बार-बार उसका गोरा-गोरा पेट देखा; उसे तसल्ली से सोफ़े पर बिठाया और बढ़िया मिठाई खिलाई, फिर उम्दा मदिरा का भी एक चषक भी अपने हाथों से पिलाया, उसके गले में उँड़ेला। कलावती, रमला, मालतीबाई, और मैनावती— इन चार के सामने मैं खुल्ला खेल खेलने और गर्भवती के पेट को पेलने की तैयारी में था। इस बार मैंने अपने मुंह से पियारी का पेट टटोला। मेरे ओठ बार-बार खुल-बंद खुल-बंद हो रहे थे व जीभ लपलपा रही थी। जीभ से पेट चाटा, अपने गालों को उसके पेट से गड़ा कर कलावती को आँख मारी। मैं धरमिया मादरजात नंगा था, और मैंने खुद अपने पुष्ट हाथों से पियारी को नंगी करना शुरू किया, आह, क्या मज़ेदार चीज थी। जब वो नंगी हो गई तो सबसे पहले उसके मम्मे गूँधे, चूंचियाँ चटकाई। फिर उसे जमीन पर सुलाया, दोनों टांगें चौड़ी की, जांघों पर चुटकी काटी, और हाँ, उसकी फुद्दी में अंगुली करना मैं कैसे भूल सकता था। खूब अंगुल-अंगूठा किया, और उसकी चूत को छेड़ा, फिर कुत्ते की तरह चाटने लगा। अब असल काम दूसरा करना था।

मैं बहुत भारी बदन का, वजनी शरीर का हरामजादा था, मैं उस गर्भवती के पेट पर सांड की तरह चढ़ना चाहता था। मैंने इस पवित्र काम के लिए अपनी दोनों टांगें भरपूर चौड़ी की और पियारी को अपनी तानी हुई टांगों के ठीक बीच में लाया, मतलब मालती मोटाटकर ने मेरे मज़े के लिए उसे घसीट कर यह क्रिया की। मेरी जांघें और गांड बहुत मोटीताजी थी, समझो हाथी। अगर मैं भक-से बैठ जाता तो पियारी का गर्भ गिर जाता, क्योंकि 90 किलोग्राम भारी शरीर उसके पेट को रौंद देता और पाप लगता। लेकिन मुझे बहदुरी से उसके पेट पर चढ़ना भी था, सो धीरे-धीरे मैं पहले उसकी जांघों से सटा और फिर सम्हल-सम्हल कर अपना पेट उसके पेट से भिड़ाया। मैंने अपना बाजन अपनी कुहनियों पर सम्हाल लिया था, सो ज्यादा गलत नहीं हुआ। मेरे भरी पेट से जब उसका कोमल पेट दबा तो उसके मुंह से एक तेज ” आह ” निकली, जिसे सुन मुझे मज़ा आया। अब मैं भद्दी तरह से अपना पेट उसके पेट पर दबाता और वो चिल्लाती, ” ओह, Ohhhh, aaah aaaaaaaaaaaah, ओ मां, ओ मां!!!!!!!!!

जब मैंने देखा कि वो बर्दाश्त नहीं कर पाएगी तब पेट से तो उतर गया पर उसके मम्मों पर अपनी भरकम गांड चढ़ा दी, मेरी गांड का कसा-करारा मांस उसके मम्मों के कोमल मांस से सट कर ऊपर-नीचे, ऊपर-नीचे ऊधम मचाने लगा। और अब लौड़ा मुझे गर्भवती के मुंह में घुसेड़ना था। बहुत मोटा और भद्दा, अश्लील लं ड था मेरा, आह। मैंने उसके सिर के बालों को झँझोड़ा, दोनों हाथों की अंगुलियों से ओटों को विपरीत दिशा में खींच कर बेशर्मी के साथ उसका मुंह फैलाया, जीभ के ऊयपर, हलक की ओर; और मधुर पुचकार कर बोला : ” लंड चूँस, मेरा लंड चूँस, बेटी लंड चूँस ”। उसकी पलकें व आँखों की पुतलियाँ अजब तरह से हिलने लगी, हाँ, तो उसने ” हू, हू” कर मेरा चूँसा।

इसके बाद मैंने उसकी चूत की चुद्दी की। यह कठिन काम था परंतु चार औरतों के सुंदर सहयोग से यह फतह हो गया। मैं एकसाथ सांड, गैंडे, और मोटे रीछ की तरह दबोच-दबोच कर उसे चो द रहा था। पीछे से, उसकी गांड चौड़ी करके और आगे से उसके पेट को सहलाते हुए। ये दिनदहाड़े की चुदाई थी, रात के लिए दूसरा बंदोबस्त था।

कुछ देर बाद मुझे सूचना मिली कि मेरे प्रोजेक्ट के लिए पाँच कन्याओं, तीन नवविवाहिताओं, चार बच्चेवाली औरतों, एक अति खूबसूरत ट्रांस-सेक्सुअल, और दो 14 साल के लौंडियों जैसे लौंडों का दल हाजिर नाज़िर है और मेरे हुकुम का इंतज़ार कर रहा है।

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