पड़ोस की भाभी

मेरा नाम राहुल है, 21 साल की उम्र, लम्बाई 5 फ़ीट 11 इंच, सांवला रंग़ और औजार 7-8 इंच लम्बा 2 इंच मोटा है ! कानपुर शहर के एक कारखाना मे पापा किरानी की नौकरी
करते है और मम्मी घरेलु कार्य सम्भालती है ! मेरी बड़ी दिदी दिपा कि शादी 2 साल पहल्रे हो चुकी है और वो देल्ही मे रहती है ! मेरे पड़ोस मे एक नये किरायेदार आये है और उनकी पत्नी का मेरे घर आना जाना शुरु हो चुका था! रानी भाभी 25 साल की गदराई माल लगती है, मेरी नज़र उनके बड़ी-2 चुची पर अक्सर चली जाती है और उनका गोल गुम्बदाकार चुत्तर मेरे लंड़ को आवेश मे ला देती है ! रानी भाभी मेरे नज़र को भांप चुकी थी और एक दिन वो मुझसे बाज़ार मे मिली…… “क्या हाल है राहुल ?

(राहुल) ठीक है भाभी, आप बताइए इधर क्या खरीद रही है ?

(रानी) वो छोड़ो, ये बताओ की तुम मुझे घुरते क्यो हो?

(राहुल) आप देखने मे खुबसुरत हो, जवान हो बस

(रानी शर्मा गयी) ठीक है तुम कल दोपहर मेरे से मिलो. ”

अगले दिन सबेरे कालेज के लिये घर से निकला और दोपहर मे रानी के घर पहुंच गया,, दरवाजा खटखटाया तो रानी भाभी दरवाजा खोली और मै उनके घर के अंदर आया ! वो दरवाजा बंद करके मेरे सामने खड़ी थी…… “राहुल अब तुम मेरी खुबसुरती को जी भर के देखो

(राहुल) जरुर भाभी. ” और मै रानी को अपने बाहो के घेरे मे ले लिया, वो मेरे से लिपटकर खड़ी थी, अपने चुची को मेरे सिने से रगड़ रही थी ! मेरा हाथ उसके चुत्तर पर घुमने लगा तो वो मेरे गाल को चुमने लगी, मेरा हाथ उनके पीठ पर घुम रहा था और रानी एक कामुक औरत की तरह मेरे मुह्न मे अपना जीभ
ड़ाल दी, उनके जिभ को चुसता हुआ उनके पीठ से चुत्तर तक को सहलाने लगा ! उम्मिद के बिपरित रानी आसानी से मेरे आगोश मे आ चुकी थी, वो जिभ खिंचकर अपना सर मेरे कंधे पर रखी और बोली……. ” 2-3 घंटे मे जी भर कर देख लो

(राहुल) जरुर रानी लेकिन मेरे देखने का तरीका अलग है ! ”

दोनो उसके बेड़ पर आ गये और वो लेट गयी ! मै उसके साड़ी को सिने पर से खिंचा और कमर से भी, ब्लाउज और साया पहनकर लेटे हुए रानी मस्त माल दिख रही थी ! मेरा हाथ उनके चुचि को पकड़्कर मसलने लगा और वो सिसकने लगी, भाभी के दोनो स्तन को मसल रहा था और उसका हाथ मेरे जिंस पर था, वो मेरे जिंस को खोलने लगी और पल भर बाद मै सिर्फ़ चड़्ही मे बैठा था ! रानी के बदन पर सवार होकर गाल चुम्ने लगा तो वो मेरे पिठ को सहला रही थी, अब मेरी नज़र उसके चुचि पर था और मै उसके ब्लाउज को उत्तार फ़ेंका, वो शर्मा रही थी और उसके दोनो चुचि ब्रा मे खुबसुरत दिख रहे थे ! मै अब उनके दोनो चुचि को मसलता हुआ सपाट पेट को चुमने लगा और वो गरम होने लगी, उसके नाभी को जिभ से चाटने लगा और साया की ड़ोरी को खोल दिया, अब साया उसके कमर से निचे करने लगा तो रानी अपने दोनो जङ्हा के बिच ही साया को दाब ली ! तो मै रानी के पैर के पास बैठकर झुका और उसके पैर को चुमने लगा, अब रानी की पकड़ धिली होने लगी तो मै उसके साया को कमर कि ओर कर दिया ! मेरा जिभ उसके जङ्हा को चाट्ने लगा और उसके दोनो जङ्हा दो दिशा मे हो गये ! अब रानी की चुत का दर्शन हुआ, ब्रेड़ पकोड़ा की तरह फ़ुली हुई बुर पर बार नही थे और दोनो रान थोड़ी दुरी बना रखे थे ! मै रानी के नितम्ब के अंदर एक तकिआ ड़ाला और अपना चेहरा उनके बुर पर लगा दिया, उसको कुत्ते की तरह सुण्घने लगा, फ़िर अपना ओंठ बुर पर घुमाता हुआ चुम्बन देने लगा ! रानी तड़्प रही थी और मै उसके बुर को उंग़ली की मदद से खोल दिया, अब गुलाबी भग्नासा मे मेरा जिभ कुत्ते कि तरह लपालप अंदर बाहर होने लगा ! मेरा मुसललंड़ फ़नफ़नाने लगा और रानी चिखने लगी….. “ऊह्ह आह्ह राहुल बुर को अपने लंड़ से चोदो. ” लेकिन मै बुर कुरेद्ता रहा और पल भर के बाद दोनो रान् को मुह्न मे लेकर चुसने लगा, उसके दोनो जङ्हा को कसकर पकड़ रखा था और वो सिसकने लगी…… ” ऊह्ह ऊम्मम राहुल मेरी बुर का रस निकल जायेगा आह्ज पी लो. ” और मै बुर का रस पीकर मस्त हो गया!

रानी बाथरूम की ओर भागी और पल भर बाद मै बिस्तर पर लेटा हुआ था और वो मेरे कमर के पास बैठ्कर अपना सर झुकाई, मेरे लंड़ को पकड़ कर चुम्ने लगी और सुपाड़ा को अपने ओंठ पर रगड़्ने लगी ! मेरा पुरा लंड़ उसके मुह्न मे था और वो लंड़ चुसते हुए मस्त हो रही थी, मेरे लंड़ का हाल खास्ता होने लगा और वो लंड़ निकालकर अपने जिभ से चाट्ने लगी ! रानी मेरे लंड़ को चोदने के लिये तय्यार कर चुकी थी, अब वो बेड़ पर लेट गयी, अपने दोनो टांग़ फ़लकाकर बुर बिचकाए मेरे लंड़ का इंतजार कर रही थी! मै रानी के दोनो जङ्हा के बीच घुट्ने के बल बैठा और लंड़ के सुपाड़े को बुर के मुहाने पर रख दिया, धिरे-2 लंड़ उसके बुर मे पेलने लगा और 2/3 लंड़ तो बुर के भितर था, फ़िर रानी के कमर को थामे एक जोर का धक्का का बुर मे दिया और पुरा लंड़ चुत मे था, लेकिन वो चिंख पड़ी….. “अरे बाप इतना मोटा लंड़ बुर फ़ाड़ देगा क्या. ” और मै पुरे गति से रानी को चोदने लगा ! वो अब सहज महसुस कर रही थी और मै रानी के चिकने बदन पर लेटकर उसको चोद्ता हुआ गाल चुमने लगा और रानी अपने चुत्तर को उपर निचे करते हुए चुदने लगी! रानी की बुर रसिली थी और मेरा लंड़ गपागप अंदर बाहर हो रहा था, उसके ओंठ को चुसने लगा और वो चुत्तर उपर निचे करने लगी! रानी की चुदाई 5-7 मिनट से चल रही थी और वो चुत्तर उपर निचे करके हांफ़ने लगी, इधर मेरा लंड़ गरम हो चुका था और रानी की बुर मानो आग की भटी हो चुकी थी, वो अब चिंखने लगी…… “अबे साले अब बुर की गरमी शांत भी करोगे या चोद्ते हि रहोगे

(राहुल) अबे रांड़ अगर जल्दी माल गिरा दिया तो कहोगी लंड़ मे जान नही है इसलिए चोदने दो

(रानी) लेकिन मेरी बुर की आग शांत होते ही मेरी बुर चुदाई से खुश हो जायेगी ” ! मै रानी को चोद्ता रहा और 15 मिनट की चुदाई के बाद चिंख पड़ा….. “ऊह्ह आह्ह मेरा लंड़ झड़ने वाला है ” मेरा मुसललंड़ बुर मे विर्यपात करा दिया और मै रानी के बुर मे लंड़ ड़ाले ही लेटा रहा !

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Linga11

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