पंजाब दियां रंगीन जट्टीयां – पार्ट – 9

हेल्लो दोस्तो मे गौरव कुमार हाज़िर हू स्टोरी का नेक्स्ट पार्ट लेकर।

रितु अब तक खाना खा चुकी थी और नहा धोकर लाला की दुकान की ओर चल पड़ी। जब वह तो जा रही तो भूरा अप्ने घर के बाहर बेठा था तो उसने रितु को जाते देख बोला, अरे भाभी जी आज सुबह सुबह कहा चल दी “।
” सेठ जी के पास किसी काम से जा रही हू भूरा ” रितु ने जवाब दिया।
” क्यो भैया जी काम पर गये है क्या जो आप जा रही हो ” भूरा बोला।
” हा भूरा वो तो की दिनो से ट्रक पर गये है, ” रितु बोली।
” आईये ना भाभी जी चाय पीते जाईये एक कप, फिर चले जाना ” भूरा रितु को निमन्त्र देते हुए बोला।
” अरे नही भुरा मुझे जल्दी है, फिर कभी चाय पिलुगी ” रितु ने जवाब दिया।
” अरे इत्नी भी कया जल्दी भाभी जी, चाय पिते जाईये 5मिंट तो लगेगे भी नही ” भूरा रितु को जोर देकर बोला।
” अच्छा अब तुम इत्ना जोर दे रहे हो तो पी लेती हू ” रितु भूरा को बोली घर मे आ गयी।
भूरा जल्दी से दो कप चाय ले आया ओर साथ मे कुछ बिस्किट भी।
” लिजिये भाभी जी, उठाईये चाय ” भूरा चाय मेज पर रख्ता हुआ बोला।
रितु ने चाय का कप उठाया और एक बिस्किट भी ले लिया।
” ओर बताईये भाभी जी कोई नयी कली आयी है के नही ” भूरा मुछो को ताव देता हुआ बोला।
” अरे अब नयी कली कहा भूरे, खर्च भुत हो जाता है और उपर से पुलिस का डर सो अलग ” रितु चाय की चुस्की लेती हुई बोली।
अप्ने पाती की गैरहाजरी मे रितु लड़किया सप्लाई करने का काम भी करती है और कभी कभी अपना घर घंटे के हिसाब से किराए पर लगाती है।
” ओर वो नयी चिडिया जो आयी है आपके पडोस मे उसका क्या सीन है ” भूरा सरबी की तरफ इशारा करते हुए बोला।
” वो एसी नही है भूरा, सीधी सादी है बेचारी काम करके घर चलाती है, ” रितु ने स्पस्ट जवाब दिया।
” अरे क्या भाभी जी जट्टी हो और सीधी सादी, और फिर आपसे तो अच्छी बनती है उसकी थोड़ा रास्ता दिखाओ मंज़िल तक भूरा खुद पहुंच जायेगा ” भूओर ने जवाब दिया।
” हम्म्म है तो बेचारी पयासी ही, कोशिश करके देख ले अगर तेरे जाल मे आ जाये तो ” रितु ने चाय का कप निचे रखते हुए कहा।
” तो समझ लो मच्छ्ली जाल मे आ गयी, मुझे भी धान्का मत केहना अगर जट्टी को अपने निचे ना ला स्कू तो ” भूरा मुस्कुरते हुए बोला।
रितु भी हसती हुई भूरा के घर से निकल गयी।
तेज तेज चलती हुई रितु लाला का दुकान पर पहुंची तो दुकान बंद थी। रितु ने लाला को फोन किया।
” हेल्लो ” लाला ने फोन उठाया और बोला।
रितु – ” हा सेठ जी रितु बोल रही हू “।
लाला – ” हाये बोल मेरि जान केसे याद किया “।
रितु – ” आपकी दुकान पर थी सेठ जी, कुछ वादा किया था आपने सोचा मे याद दिला दूं “।
लाला – ” अरे रानी याद है मुझे तेरे से किया वादा लेकिन अभी तो मे शहर से बाहर गया काम से “।
रितु – ” तो कब तक लौटेगे बता दिजीये तब आ जाओगी मे “।
लाला – ” कल सुबह तक आओगा जान तब, तेरा वादा भी निभा दूगा और कुछ काम है वो भी निपटा लेगे “।
रितु – ” ठीक है सेठ जी कल सुबह आओगी फिर, अब रखती हू फोन “।
लाला – ” ठीक है मेरि रानी “।
रितु ने फोन रखा और वापिस घर की और चल दी।

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