पंजाब दियां रंगीन जट्टीयां – पार्ट – 6

हेलो दोस्तो मे गौरव कुमार स्टोरी का अगला पार्ट लेके हाज़िर हू। पिछ्ले पार्ट मे आपने पढ़ा के केसे रितु सरबी को लाला का लण्ड लेने के लिये मनाती है और सरबी भी इसके लिये राजी हो जाती है। रितु फ़ोन पर लाला को सरबी को उसके पास दुकान पर लाने की करती है और शं होते ही दोनो लाला की तरफ चल देती है।
तो आईये कहानी को आगे बढ़ाते है।

सराय और रितु दोनो लाला की दुकान की तरफ चल देती है। सरबी ने लाल रन्ग का सूट पहना हुआ है, पैरो मे पायल, दोनो हाथो मे 8-8चूडिया पहने आज उसने अपना शिन्गार किया है। जब वह लाला की दुकान पर पहुंचती है तो रितु लाला को बुलाती है, “राम राम लाला जी”। लाला आंखे बन्द करके लेटा हुआ था, रितु की अवाज सुनते ही आंखे खोलता है, “अरे राम राम रितु रानी, बडी देर करदी आने मे”। “हम तो टाईम पर ही है लाला जी लेकिन आप तो अभी से सो रहे है” रितु लाला को बोली। “अरे सो कहा रहा हू बस एसे ही आराम कर रहा था” इत्ने मे लाला की नज़र सरबी पर पडी, “कया बात है सरबी आज तो पूरी नयी नवेली दुल्हन लग रही है तू” लाला सरबी को छेड़ता हुआ बोला। “अरे दुल्हन तो लगेगी ही लाला जी आज इसे इस्का दूल्हा जो मिलने वाला है” रितु बोली और हँसने लगी, सरबी भी मुस्कुरा रही थी और उसने रितु को धक्का सा मारा। “अरे मुझे नही अज के बाद अपने दूल्हे को धक्के मारना” रितु ने सरबी को हन्स्के बोला। लाला की नज़र सरबी पर ही टिकी हुई थी, “शरमाओ मत सरबी डार्लिंग, बस मजे लो इस जिन्द्गगी के” लाला सरबी को बोला। लाले ने रितु को आंख से सरबी को अन्दर लिजाने का इशारा किया।
रितु भी लाला का इशारा समझ गयी, “आजा सरबी” रितु सरबी को अन्दर ले जाने लगी। सरबी भी रितु के पीछे चली गयी। लाला ने चारो तरफ देखा और दुकान का दरवाजा बंद कर लाईट जला दी। शाम के 7बज रहे थे। रितु सरबी को उसी सुरंग टाइप कमरे मे ले गयी, वहा पर जाके देखा तो लाला ने बिस्त्र पर फूल बिछाये हुए थे और बिस्तर को अच्छे से फूलो से सजाया हुआ था जेसे किसी की सुहागरात का बैड हो।
“देख तो तेरे आने की खुशी मे केसे कमर सजाया है लाले ने” रितु बोली। सरबी भी देख रही थी लेकिन थोडा डर रही थी, “रितु कुछहोगा तो नही ना”।
“कुछ नही होगा सरबी, किसी को पता नही चलेगा बस तू शर्माना मत और मजे ले, ये बैड तो देख लाला, रानी बनज लाला की सरबी और फिर ऐश करना” रितु बोली। सरबी भी देखे जा रही थी, रितु ने सरबी को कमरे मे पडी एक कुर्सी पर बिठाया, “देख सरबी मजे लेने है तो बिल्कुल मत शर्माना, और किसी बात की चिंता मत कर, बाहर किसी को कानो कान खबर ना होगी” रितु बोल रही थी और सरबी सुने जा रही थी। “अच्छा मे चलती हू अब” रितु सरबी को बोल कर बाहर दुकान मे आ गयी यहा लाला बेठा था, “कर दिया तैयार जान जट्टी को” रितु को देख लाला बोला।
“एक दम तैयार है लाला अब तो तेरी कमी है उस कमरे मे, दुल्हन बेठी इन्तज़ार कर रही है” रितु बोली।
“अरे तो दूल्हा भी जा रहा है अब, तू इस कमरे मे चली जा” लाला ने रितु को सीढियों के साथ वाला कमरा खोला। रितु कमरे मे सोने चली गयी और लाला अपनी दुल्हन सरबी के पास चल दिया। रुम के अन्दर आकर लाला ने कुंडी लगा दी और कमीज उतर कर खूँटे पर टांग दी, लाला अब बनयान और धोती मे था। लाला बैड पर जा बेठा, “यहा आओ सरबी इतनी दूर क़ बेठी हो” लाले ने सरबी पास बुलाया। सरबी कुर्सी से उठी और लाला की तरफ चल दी, उसके पैरो की पायल से छणछण की अवाज आने लगी। सरबी लाला के पास आके खडी हो गयी। लाले ने सरबी उपर से निचे तक देखा, “अरे शर्मा क़्यो रही हो जान, अब तो तुम मेरि दुल्हन बनने जा रही हो, बेठो यहा” लाला सरबी को बोला। सरबी लाला के पास बेठ गयी लेकिन उसे अब भी शर्म आ रही थी, अज पहली बार वो किसी पराये मर्द के साथ एसे बेठी थी। लाला ने सरबी के चेहरे को उपर उठा अपनी तरफ घुमाया और देखने लगा। सरबी भी लाला को देख रही थी, “कितनी सुन्दर हो तुम जट्टी” लाला ने कहा तो सरबी ने शर्मकर नज़रे झुका ली। “मे तो तुमे जट्टी ही बुलओगा लेकिन तुम मुझे कया कहोगी बोलो” लाला सरबी को बोला। “लाला जी” सरबी ने हल्की अवाज मे जवाब दिया। “अरे सुना नही मुझे जोर से कहो” लाला बोला। सरबी ने थोडी उची अवाज मे कहा “लाला जी”। “हाये जान निकाल ली जट्टी तुने तो लाला की” लाला सरबी को बोला।
“मेने जान केसे निकल ली लाला जी आपकी” सरबी ने थोडा शर्माते हुए पुछा। “अरे ये पुछ केसे नही निकाली जट्टी, तेरा मुस्कुरना, तेरी आंखे का वो नशा, तेरे जिस्म मे दौडती जवानी की बिजली, तेरे प्यारे और छोटे छोटे ये मुम्मे, तेरी वो चुतड्ड मटका के चल्ना और” इस से पहले के लाला कुच और बोलता सरबी ने लाला के मुंह पर हाथ रख उसे चुप करवाया। सरबी लाला की बाते सुन शर्म से लाहो गयी थी। लाला ने सरबी के हाथ को अपने हाथ मे पकडा और चूम्ते हुए मुंह से हटाया। लाला सर्बी की आंखो मे देख मर बोला ” बनेगी इस लाला की जान जट्टी, रानी की तरह रखुगा तुमे”।
“हा लाला जी” सरबी बोली, सरबी अब कम शर्मा रही थी लाला से, शायद उसे भी अब लाला के रूप् मे अपनी जवानी का मालिक मिल गया। सरबी के हा बोलते ही लाला ने सरबी को बाहो मे भर कर बैड पर लिटा लिया और उसके उपर आ होंठो को चूमने लगा। सरबी ने लाला के गले मे अपनी बाहो का हार डाल दिया और उसके होंठ चूम्ने लगी। लाला सरबी के होन्य्हो को चूसे जा रहा था और उसके हाथ सरबी के 34के मुम्मो को मसल रहे थे। सरबी लाला के जिसम को सहलाए जा रही थी, उसके मुम्मे लाला के हाथो मे आकर अकड रहे थे और निप्पल कडक हो गये थे। लाला सरबी के होंठ चुस्ते हुए खडा हुआ और कुर्सी पर जाकर बेठ गया। सरबी को समझ नही के लाला ने ऐसा क़्यो किया और वो बिस्तर पेर लेटी लाला को देख रही थी। “यहा अपने लाला के पास आओ जट्टी” लाला ने सरबी को बुलाया। सरबी भी बिस्तर से उठी और लाला के पास चली गयी, लाला ने सरबी को बाह से पकड खीच लिया और गोद मे बिठा लिया। “अपनी जवानी के दर्शन नही कर्वओगी जट्टी” लाला ने सरबी के मुम्मे म्स्ल्ते हुए कहा।
“तो कारलो ना दर्शन जट्टी की जवानी के लाला जी, अपको रोका किस्ने है” सरबी ने कहा। “रोकने वाला है कौन जान मुझे जब तुम इस लाला की हो गयी हो लेकिन अपनी जवानी के दर्शन तुम खुद कर्वओ मुझे” लाला ने सरबी को गोद से उठाते हुए बोला।
सरबी खडी थी और लाला उसे देख रहा था, एकाएक सरबी ने अपनी कुर्ती उतारनी शुरु करदी। जेसे जेसे सरबी कुर्ती उतर रही थी लाला जट्टी की जवानी देखने के लिये तडप बढ रही थी। सरबी ने कुर्ती उतर दी और लाला के सम्ने सलवार और ब्रा मे खडी थी। जेसे ही सरबी का हाथ सलवार के नाडे पर गया तो लाला बोला “रुको जट्टी”। लाला उठकर सरबी के पास आकर निचे बेठ गया, और अपने होंठ सरबी की नाभि पर रख दिये। “आह्ह्ह्ह लाला जी” लाला के होंठ सरबी के नाभि पर जाते ही सरबी की सिसकी निकल गयी। लाला सरबी की नाभि को चूम रहा था और उसकी कमर को हाथो से सहला रहा था। धीरे धीरे लाला ने सरबी की सलवार का नाड़ा दाँतो से खींच कर खोल दिया। नाड़ा खुलते ही सलवार जट्टी की टांगों से खिसकती हुई पैरो मे जा गिरी। सरबी अब सिरफ ब्रा और पेंटी मे लाला के सम्ने थी। लाला ने ब्रा के उपर से सरबी की चुत को चूम लिया और हाथो से उसके 36के चूतड़ दबा दिये। “हाये लाला जी”सरबी की सिसकी निकली और उसके हाथ लाला के सर को सहलाने लगे। लाला भी सरबी के चूत्डो को दबाते हुए पेंटी के उपर से चूमने लगा। लाला ने सरबी को बैड पर लेटा दिया और उसके उपर आ गया। लाला जट्टी की आंखो मे देख रहा था और फिर उसने अपना मुंह सरबी मुम्मो पर रख दिया। लाला ब्रा के उपर से सरबी के मुम्मे चुस्ने लगा, “आअह्ह्ह लाला जी”सिसकिया लेती सरबी लाला ते जिस्म को श्ल रही थी। लाला ने अपना हाथ सरबी की पीठ पर ले गया और ब्रा की हूक खोल ब्रा निकल कर फेंक दी। “उउफ्फ्फ जट्टी तेरे मुम्मे कित्ने गोरे है दूध जेसे, लेकिन ये इत्ने छोटे क्यो है जान” लाला ने सरबी को देख कर पूछा।
“क्यो के इन्हे अब तक किसी ने भी अपकी तरह प्यार नही किया लाला जी” सरबी लाला की आंखो मे देख बोली। “तो आज से लाला रोज जट्टी के मुम्मो को प्यार करेगा” लाला बोला और सरबी का मम्मा मुंह मे डाल चुस्ने लगा। “हाये लाला जी”सरबी भी सिसकिया लेते हुए लाला से मुम्मे चुस्वने लगी और उसके बदन को सहलाने लगी। लाला सरबी का पुरा मम्मा मुंह मे डालकर चूस रहा ओर दुसरे मुम्मे को हाथ से दबा रहा था। सरबी भी लाला के निचे पने चुस्वा मजे ले रही थी, आज पहली बार कोई मर्द सरबी के मुम्मो को मुंह मे भर कर चूस रहा था। सरबी आह्ह्ह स्स्सीई हाये लाला जी जेसी आवाजे निकल रही थी। मुम्मे चुस्त हुआ लाला सरबी के पेट को चूम्ने लगा और धीरे धीरे उसके होंठ सरबी की चुत पर आ गये जो अब तक लाला की नज़रो से पेंटी मे छुपी हुई थी। लाला ने धीरे धीरे सरबी की पेंटी उतार्नी शुरु की और उसे उतर कर निचे फेंक दिया। जेसे ही पेंटी फेंक लाला ने नज़र घुमायी तो दूध जेसी गोरी जट्टी लाला के बिस्तर पर नंगी पडी थी। लाला की नज़रे सरबी की चुत पर आ गयी। सरबी की चुत उसकी टांगो मे बीच छुपी हुई थी, चुत हल्के हल्के बाल थे। लाला ने अपनी बनयान उतार दी और सिर्फ धोती मे आ गया। उसने सरबी की तरफ देख टाँगे खोल्ने का इशारा किया। जेसे ही सरबी ने टाँगे फैलायी तो जट्टी की चुत लाला के सामने आ गयी। लाला ने एक हाथ से चुत को खोला तो जट्टी की गुलाबी चुत का छेद लाला को साफ दिखाई देने लगा। लाला ने झुक कर अपने होंठो से चुत को चूम लिया। लाला के चुत को चूम्ते ही ज़रबी सिहर उठी उसके बदन मे जेसे हज़ारो वोल्ट का करंट दौडने लगा। लाला ने जीभ से चुत चाटनी शुरु करदी, स्स्सीईईई आह्ह्ह लाला जी कहती हुई जट्टी के हाथो ने लाला को सर से पकड लिया और पागलो की तरह उसे चुत पर दबने लगी। लाला भी चुत को खोल कर जीभ से चाट रहा था। कभी कभी लाला अपने दाँतो से चुत को हल्का सा काट लेता जिस से सरबी और भी उतेजित हो जाती। आआह्ह्ह्ह लाला जी स्स्सीईई हाये चुस्स लो इसे, सरबी लाला को बोल रही थी। करीब 30मिंट बाद सरबी का जिस्म अकड़ने लगा और उज़्की जवानी का रस्स चुत से रिस्ने लगा, आह्ह्ह्ह लाला जी कहती हुई सरबी झड़ रही थी और लाला उसके रस्स को पिए जा रहा था।
सरबी झड़ कर निढ़ाल हो गयी, और लाला का लण्ड आब धोती मे से खडा होकर सांप की तरह फ़ूकारे मार रहा था।

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