कामिनी की कामुक गाथा (भाग 46)

पिछली कड़ी में आपने पढ़ा कि किस तरह मैं अपने बेटे क्षितिज, जो कि बिल्कुल अनाड़ी था स्त्री संसर्ग के लिए, संभोग सुख से अपरिचित, के साथ हमबिस्तर हुई। वह मेरे आकर्षण के वशीभूत वह सब कुछ कर बैठा जो हमारे समाज के लिए वर्जित है। इसमें मेरी भूमिका बेहद अहम थी। मैं सबकुछ जानते बूझते उसके इस कुकृत्य में सहभागी हुई। अगर मैं दृढ़ता पूर्वक मना कर देती तो बात यहां तक नहीं बढ़ती लेकिन मेरी खुद की कमजोरी के कारण यह सब संभव हुआ। मेरी वासना की अदम्य भूख के आगे सारी वर्जनाएं छिन्नभिन्न हो कर रह गयीं। पहले मैंने उसे मुख मैथुन का सुख दिया, उससे मुख मैथुन का सुख लिया, फिर योनि मैथुन के लिए प्रोत्साहित किया और हम दोनों ने बेशर्मी की हदें पार करते हुए योनि मैथुन का आनंद लिया। अंततः रही सही कसर पूरी हो गई गुदा मैथुन से। स्त्री की नग्न देह का किन किन तरह से उपभोग करना है, इससे वह बखूबी परिचित हो गया। स्त्री देह के विभिन्न अंगों से किस तरह आनंद लेना है यह वह बखूबी सीख गया था। स्त्री शरीर के विभिन्न महत्वपूर्ण उत्तेजक अंगों से परिचित हो गया था। एक तरह से कहूँ तो कामक्रीड़ा में दक्ष होता जा रहा था। अच्छा रूप रंग था, शरीर शौष्ठव अच्छा था, अच्छा लिंग था, संभोग के लिए उपयुक्त समुचित शक्ति थी उसमें, स्तंभन क्षमता गजब की थी। सिर्फ आवश्यकता थी तो कामक्रीड़ा को और आनंदमय बनाने हेतु विभिन्न कलाओं के प्रशिक्षण की, विभिन्न मुद्राओं, वभिन्न आसनों के जानकारी की। फिर तो पूरा कामदेव का अवतार ही बन जाना था उसे। उसकी मां होकर भी मैं ने जब उसे अपने शरीर के माध्यम से संभोग सुख का परिचय करा दिया तो अब आगे के प्रशिक्षण का दायित्व भी मुझे ही निभाना था। बेगैरत, बेहया, वासना की पुतली, कमीनी, कुलटा, छिनाल तो थी ही, मां बेटे के पाक रिश्ते की धज्जियां उड़ाने में जिसे तनिक भी झिझक नहीं हुई उसके लिए यह कार्य कौन सा मुश्किल था। मैं भी खुद चाहती थी कि वह इन सारी कलाओं में दक्ष हो जाए और कूप मंडूक न रह कर घर के बाहर की विस्तृत दुनिया में अपने मन मुताबिक अन्य नारियों के संसर्ग का लुत्फ ले। कामदेव सरीखा तो वह था ही, मुझे पूर्ण विश्वास था कि ऐसी लड़कियों, नारियों की कमी नहीं होने वाली थी उसके लिए, आखिर कब तक मैं उसे अपने पल्लू से बांध कर रखती। मैं खुद भी तो एक नंबर की आजादीपसंद चुदक्कड़ ठहरी, विभिन्नता पसंद, बेलौस, अदम्य वासना की भूखी कुतिया। एक पुरुष से बंध कर कैसे रह सकती थी भला। नित नये मर्दों से चुदवाने की चाहत में किसी भी हद तक जा सकती हूं। ऐसी ही हूं या परिस्थितियों वश ऐसी ही बना दी गई हूं।

गुदा मैथुन में क्षितिज एक नवीन आनंद से रूबरू हुआ था उस रात। नारी शरीर के विभिन्न अंगों से इतने विभिन्न तरीकों से आनंद लिया जा सकता है, यह उसे बहुत जल्द पता चल रहा था। गुदा मैथुन का दौर खतम होने के बाद हम एक दूसरे की नग्न देह से चिपके हुए कुछ देर उस आनंदमय सुखद आहसास में डूबे हुए थे। मेरी गांड़ का भुर्ता बन चुका था लेकिन मैं बेहद खुश थी। अब मुझे तलब हो रही थी मेरी भूखी चूत की भूख मिटाने की। फिर से कुतिया बनना चाहती, कुतिया बनकर चूत चुदवाना चाहती थी। मेरा हाथ उसके सीने से होता हुआ धीरे धीरे उसके पेट की ओर बढ़ने लगा। वह आंखें बंद किए मेरे हाथ के स्पर्श का आनंद ले रहा था। शनैः शनैः मेरा हाथ उसके पेट से होते हुए उसकी नाभी तक पहुंच चुका था। मैं और नीचे अपना हाथ ले गई, उसकी नाभी से नीचे, और नीचे, और नीचे, उसके रोयेंदार झांट को सहलाने लगी। अब वह तनिक कसमसाया।

“जा मेरी जान, और नीचे जा, मेरे पपलू, मेरे लौड़े तक ओह हां, हां खेल मेरी माँ मेरे लौड़े से मेरी प्यारी बुरचोदी मॉम।” उद्गार थे उसके। छू लिया मैंने उसके सख्त होते लंड को। सहलाने लगी उसके गरम होते हुए लौड़े को, ऊपर से नीचे तक। पकड़ लिया अपनी मुट्ठी में उसके मोटे होते हुए गधे जैसे हथियार को। लंड के ऊपरी चमड़े को हौले हौले ऊपर नीचे करने लगी। “आह्ह् ओह्ह अच्छा लग रहा है उफ्फ्फ, करती रह ओह मेरी चूतमरानी मां।” उत्तेजित करने में सफल हो गयी थी। काफी सख्त और मोटा हो चुका था उसका लंड।

“वाह मेरा राजा बेटा, मेरा लंड राजा, कितना मस्त लंड पाया है रे तू। सचमुच गधे जैसा लंड। हाय, लड़कियां और औरतें तो मर ही जाएंगी ऐसे लंड पर। ओह मेरे रसिया, जरा आंखें खोल कर देख दुनिया को चारों तरफ, एक से एक बढ़कर कितनी खूबसूरत लड़कियों और औरतों से भरी हुई है दुनिया, तेरे जैसे खूबसूरत मर्द पर मर मिटने को तैयार।” मैं भा्सनात्मक शब्दों के साथ क्षितिज के लिंग को सहलाती हुई बोलती जा रही थी। मैं किसी न किसी तरह उसके मन में एकमात्र मेरे प्रति आसक्ति और मोह को सामान्य पुरुषों की भांंति अन्य नारियों के प्रति पुरुषों के विपरीत लिंग के बीच वाले सामान्य आकर्षण में बदलने की कोशिश करने लगी ताकि मैं उसके मोहपाश से स्वतंत्र होकर यहां वहां मुंंह मार सकूं। आखिर कामुकता की साक्षात प्रतिमूर्ति मर्दखोर औरत जो ठहरी।

“मेरी जान देखूंगा देखूंगा, दुनिया भी देखूंगा। फिलहाल तो सिर्फ मुझे आप ही आप दिख रही हो मॉम, मेरी चूतमरानी, बुरचोदी, खूबसूरत, मस्त मस्त दुनिया की सर्वोत्तम मॉम, जो अपने बेटे की खुशी के लिए गर्लफ्रैंड बन सकती है, बेड पार्टनर बन सकती है, मन से भावनात्मक रिश्ते को निभाते हुए अपने शरीर को भी अर्पित कर सकती है। कमाल हो मॉम, आई रीयली लव यू।” उसने मुझे बांहों में भींच कर कहा।

“पागल कहीं का। तेरे भले के लिए कह रही हूं पागल। अभी तू जवान होता जा रहा है और मैं बूढ़ी। तेरी जवानी मुझ बुढ़िया पर बरबाद होते नहीं देख सकती मैं। मेरी खुशी चाहता है ना तू?”

“हां मॉम, आपकी खुशी के लिए मैं कुछ भी करने के लिए तैयार हूं।”

” तो मेरी खुशी के लिए ही सही, एक बार मेरे अलावे किसी और नारी को ट्राई कर के देख नारियों की भीड़ में। कसम से तू एक खोजेगा, तुझे दस मिलेंगी। चुनाव कर, स्थाई न सही अस्थायी ही सही, चख कर देख, चोद कर देख, जिंदगी खूबसूरत बन जाएगी तुम्हारी।” आप सोच रहे होंगे कितनी कमीनी हूं मैं। ऐसी ही हूं मैं। जानबूझकर उसे धकेल रही थी वासना के उस दलदल में जहां इस वक्त मैं थी। अरे क्या गलत क्या सही कौन जानता है, आपसी रजामंदी से जिंदगी का मजा लेते रहने में मुझे तो कोई गलती नजर नहीं आती है।

“ओके मॉम, आपने कह दिया और सोच लीजिए मैंने कर दिया। लेकिन इसकी शुरुआत मैं आपके जैसी ही किसी मैच्योर लेडी से करना चाहता हूं। जो आपकी जैसी समझदार और आजादख्याल हों।”

“ओह माई स्वीट सन, आई लव यू” खुश हो गयी मैं। चूम लिया मैंने उसे खुशी के मारे। “बस कुछ बातों का ख्याल रखना होगा तुझे। धूर्त औरतों से दूर रहना। जबर्दस्ती किसी से करना नहीं, अगर जबर्दस्ती करना भी हो तो उनसे करना जिसके बारे में तुम्हें विश्वास हो कि उसे तेरी चुदाई की दीवानी बना सको। कई ऐसी औरतें मिलेंगी जो पारिवारिक सेक्स से असंतुष्ट रहती हैं, ऐसी औरतों पर उपकार करने से परहेज न करना। कोई ऐसी बदचलन लड़की जिसे तुम पसंद नहीं करते अगर जबर्दस्ती तेरे गले पड़ना चाहे तो आरंभ में ही सख्ती से मना कर दो, कई बार ऐसी लड़कियां बाद में कैंसर बन जाती हैं। इन सबके अलावे भी कई ऐसी बातें हैं जिन्हें तुम समय के साथ अपने अनुभव से सीख लोगे, ऐसा मेरा विश्वास है। वैसे फिलहाल तुम्हारी सलाहकार मैं तो हूं ही, लेकिन अपने विवेक से काम लेना भी तुम सीख लोगे ऐसा मेरा मानना है।” मैंने देखा कि उसपर मेरी बात का असर हो रहा है। मैं कामयाब हो रही थी अपने मकसद में। उसका ध्यान अन्य स्त्रियों की ओर भटकाने में, अन्य स्त्रियों में उसकी रुचि जगाने में।

आगे क्या हुआ यह आप अगली कड़ी में पढ़िएगा।

तबतक के लिए अपनी कामुक रजनी को आज्ञा दीजिए।

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Rajni4u

मैं एक 51 साल की विधवा शिक्षिका हूँ। मैं कामोत्तेजक कहानियां पढ़ना, दोस्ती करना और दोस्तों से किसी भी प्रकार की चैटिंग करना पसंद करती हूं। मेरी रुचि संगीत में भी है। फिलहाल मैं अपनी कामुक भावनाओं को कहानियों के माध्यम से लोगों के सम्मुख प्रस्तुत करने का प्रयास कर रही हूं।